“मैं हाथों से पत्थर हटाता रहा, पर अपनों की सांसें नहीं बचा सका” प्रतापगढ़ हादसे में अमन ने सुनाई 6 जिंदगियों के दफन होने की कहानी

प्रतापगढ़ के महुली गांव में भारी बारिश के दौरान एक पुराना जर्जर मकान ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। हादसे में केवल अमन श्रीवास्तव जिंदा बचे, जिनका इलाज चल रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 6 August 2026, 12:18 PM IST
google-preferred

Pratapgarh: आसमान से बरसती झमाझम के बीच प्रतापगढ़ के महुली गांव में उस रात सिर्फ पानी की बूंदें नहीं गिरीं, बल्कि एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए काल के गाल में समा गया। एक पुराना, जर्जर मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गया और एक पल में छह जिंदगियों की सांसें थम गईं। हादसे में एक मात्र सदस्य अमन श्रीवास्तव (28 वर्ष) बच गया लेकिन वह भी हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया है। गंभीर हालत में उसका उपचार स्वरुप रानी अस्पताल प्रयागराज में चल रहा है।

सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन

गुरुवार की तड़के जब इस दिल दहला देने वाले हादसे की खबर फैली, तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस और फायर विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। इस दौरान अमन श्रीवास्तव की चीख-पुकार सुनकर टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज भिजवाया।

ये भी पढ़ें - Pratapgarh: जिस वाहन में ले जाया जाता है शव उसमें हो रहा ये काम

अमन ने सुनाई खौफनाक रात की कहानी

अस्पताल के बिस्तर पर कराहते हुए अमन ने जब उस खौफनाक रात की दास्तान सुनाई, तो सुनने वालों की आंखें नम हो गईं। उसने बताया कि रात के समय उमस और गर्मी अधिक होने के कारण परिवार के सभी सात सदस्य एक ही एयर-कंडीशनर (AC) वाले कमरे में सो रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस छत के नीचे वे सुरक्षित महसूस कर रहे थे, वही उनका काल बन जाएगी।

'मैं अपनों को बचाने के लिए चीखता रहा...'

रोते-बिलखते और आंसुओं में डूबे अमन ने कहा, "जब रात को अचानक तेज आवाज के साथ छत गिरी, तो मेरी आंख खुली। मुझे महसूस हुआ कि मैं मलबे के नीचे पूरी तरह दबा हुआ हूं। मैंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और मलबे से बाहर निकलने का रास्ता बनाया। बाहर आते ही मैंने देखा कि मेरे माता-पिता, मेरा छोटा भाई, मेरी पत्नी और मेरे दो छोटे बच्चे सब मलबे के नीचे दबे हुए थे। मैंने अपने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश की, पर पत्थर बहुत भारी थे... मैं अपनों को बचाने के लिए पागलों की तरह चीखता रहा, गिड़गिड़ाता रहा।"

दो घंटे चला रेस्क्यू, लेकिन नहीं बच सकीं छह जिंदगियां

अमन की चीखें सुनकर आसपास के पड़ोसी और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर दौड़े। उन्होंने अपने स्तर पर रेस्क्यू शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। लगभग दो घंटे तक चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। 

ये भी पढ़ें - Pratapgarh: अखिलेश यादव की हिरासत पर भड़के सपाई, सरकार के खिलाफ की जमकर नारेबाजी

एक पल में उजड़ गया पूरा परिवार

इस हादसे ने प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष), रीता श्रीवास्तव (55 वर्ष), नितिन श्रीवास्तव (25 वर्ष), माधुरी (23 वर्ष), और दो मासूम कलियों माधव (2 वर्ष) व महज 4 महीने के अद्विक को हमेशा-हमेशा के लिए छीन लिया। एक पल में पूरा घर श्मशान बन गया और पीछे छूट गई तो सिर्फ अमन की चीखें और कभी न खत्म होने वाला दर्द।

Location :  Pratapgarh

Published :  6 August 2026, 12:18 PM IST

Advertisement