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प्रतीकात्मक फोटो (Image: Pinterest)
Noida News: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की धारावी की तरह अब उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा में भी एक बड़ी झुग्गी बस्ती विकसित हो गई है। दिल्ली से सटे नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में बनी यह बस्ती अब प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। आरोप है कि प्राधिकरण की अर्जित जमीन पर वर्षों से अवैध निर्माण होता रहा, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सेक्टर-1 से सेक्टर-11 तक फैले इस इलाके को अब लोग नोएडा का ‘धारावी’ कहने लगे हैं। यहां हजारों झुग्गियां ही नहीं, बल्कि कई जगह चार और पांच मंजिला पक्के निर्माण भी खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, इस क्षेत्र में झुग्गियों का निर्माण साल 1999 के आसपास शुरू हुआ था। वर्ष 2009 तक यहां करीब 11 हजार झुग्गियां बन चुकी थी। उस समय सरकार ने झुग्गीवासियों को दूसरी जगह बसाने के लिए पुनर्वास योजना तैयार की थी। इसके तहत फ्लैट बनाए गए, लेकिन पूरी तरह विस्थापन नहीं हो सका। दूसरी ओर, समय के साथ झुग्गियों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। साल 2020 में एक बार फिर झुग्गीवासियों को पुनर्वास योजना के तहत दूसरी जगह भेजने की कोशिश की गई। करीब 2200 झुग्गीवासियों को फ्लैट भी दिए गए, लेकिन बाकी लोगों का विस्थापन नहीं हो पाया।
पुनर्वास योजना के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई। बताया जाता है कि जिन लोगों ने झुग्गियां खाली कर फ्लैट ले लिए, उनकी जगह नए लोगों ने कब्जा कर लिया। इससे नोएडा प्राधिकरण को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक तरफ पुनर्वास के लिए फ्लैट दिए गए, वहीं दूसरी तरफ झुग्गियों वाली जमीन खाली नहीं हो सकी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस इलाके में करीब 100 भू-माफियाओं द्वारा 50 हजार से ज्यादा पक्की झुग्गियों के निर्माण का दावा किया गया है। आरोप है कि इन झुग्गियों को किराये पर देकर हर महीने बड़ी रकम कमाई जा रही है। वहीं, बाजार मूल्य के हिसाब से इस जमीन की कीमत करीब 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार इस क्षेत्र में औद्योगिक और व्यावसायिक भूखंडों की योजना प्रस्तावित थी।
नोएडा प्राधिकरण के लैंड ऑडिट को लेकर कैग ने वर्ष 2017 में रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में सेक्टर-4, 5, 8, 9 और 10 में करीब एक लाख वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे का उल्लेख किया गया था। उस समय जमीन की कीमत करीब 36,200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वर्तमान समय में इसकी कीमत बढ़कर करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
मुंबई की धारावी करीब 2.1 से 2.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है, जहां बड़ी आबादी रहती है। इसी तरह नोएडा के औद्योगिक फेज-1 में भी लगातार बढ़ती झुग्गी बस्ती ने शहर के विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से कैसे मुक्त कराया जाए और वर्षों से रह रहे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था कैसे की जाए।
Location : Noida
Published : 23 September 2026, 5:58 AM IST