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आगरा के बरहन थाना क्षेत्र में सड़क हादसे के रूप में दर्ज मामला साजिशन हत्या निकला। पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या का खुलासा किया। प्रेम प्रसंग और आपसी रंजिश को हत्या की वजह बताया गया है।
आगरा में सड़क हादसे का सच आया सामने
Agra: आगरा जनपद के थाना बरहन क्षेत्र में सामने आई एक सनसनीखेज घटना का पुलिस ने सफल अनावरण करते हुए बड़ा खुलासा किया है। पहले जिसे सड़क हादसा बताकर पुलिस और परिजनों को गुमराह करने की कोशिश की गई, वही मामला पूरी तरह से साजिशन हत्या निकला। दिनांक 19 दिसंबर 2025 को अज्ञात वाहन से टक्कर लगने के कारण पुनित सिसोदिया की मौत की सूचना दर्ज कराई गई थी, लेकिन गहन जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह एक सोची-समझी हत्या थी।
प्रारंभिक सूचना के अनुसार पुनित सिसोदिया की मौत रेलवे अंडरब्रिज के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से हुई बताई गई थी। घटनास्थल की स्थिति और प्रथम दृष्टया परिस्थितियों के आधार पर मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा था। हालांकि उच्चाधिकारियों को कुछ तथ्यों पर संदेह हुआ, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए।
पुलिस आयुक्त के निर्देशन में थाना बरहन पुलिस, सर्विलांस टीम और एसओजी पश्चिमी जोन की संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया, मृतक की कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की। इसी दौरान कई अहम सुराग हाथ लगे, जिनसे हादसे की कहानी कमजोर पड़ने लगी।
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जांच में सामने आया कि पुनित सिसोदिया की हत्या आपसी रंजिश और पुराने प्रेम प्रसंग का नतीजा थी। अभियुक्तों के मन में लंबे समय से द्वेष था और वे बदला लेने की फिराक में थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने हत्या से पहले करीब 10 से 15 दिन तक मृतक के रोजमर्रा के रूटीन की रेकी की थी।
पुलिस के अनुसार 18 दिसंबर 2025 की रात अभियुक्तों ने रेलवे अंडरब्रिज के पास घात लगाकर पुनित सिसोदिया पर हमला किया। जैसे ही वह निर्धारित स्थान पर पहुंचा, आरोपियों ने उस पर फावड़े के लकड़ी के बेंटों से सिर पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या को हादसे का रूप देने के लिए शव को इस तरह रखा गया कि मामला सड़क दुर्घटना लगे।
हत्या के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के लिए फावड़े के बेंटों को रेलवे लाइन के पार फेंक दिया। इसके साथ ही उन्होंने आपस में तय किया कि किसी को भी इस साजिश की भनक न लगे। आरोपियों को पूरा भरोसा था कि मामला सड़क हादसे के रूप में दर्ज हो जाएगा और वे कानून की पकड़ से बच जाएंगे।
हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी जश्न मनाते रहे। लेकिन अगली सुबह जब उन्हें पता चला कि उन्होंने जिस व्यक्ति को निशाना बनाया था, वह गलत व्यक्ति था, तो वे घबरा गए। इस चूक ने उन्हें और अधिक सतर्क बना दिया, लेकिन तब तक पुलिस जांच सही दिशा में बढ़ चुकी थी।
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पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चारों अभियुक्तों को चिन्हित किया। कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद पुलिस ने चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कारें, छह मोबाइल फोन और हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद किए हैं। बरामद सामानों के आधार पर विवेचना को और मजबूत किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराएं जोड़ते हुए केस को हत्या में तब्दील किया गया।