CBI की बड़ी कामयाबी: नोएडा से सरित विज को पकड़ा, 58 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर 26 साल से था फरार

CBI ने 58 लाख की कस्टम धोखाधड़ी के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। 26 साल से फरार घोषित अपराधी सरित विज को नोएडा से गिरफ्तार किया गया। आरोपी पहचान बदलकर रह रहा था और उस पर 10 हजार का इनाम घोषित था।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 8 January 2026, 6:54 PM IST
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New Delhi: सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने एक बड़ी और लंबे समय से लंबित कार्रवाई को अंजाम देते हुए कस्टम विभाग से जुड़ी लगभग 58 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में घोषित अपराधी सरित विज उर्फ शरत कुमार विज को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले करीब 26 वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था और उस पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित था। पहचान बदलकर फरारी काट रहा यह आरोपी आखिरकार CBI की तकनीकी निगरानी और गहन जांच के चलते पकड़ा गया।

1999 में दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का मामला

CBI के अनुसार, यह मामला 01 जून 1999 को दर्ज किया गया था। इसमें जोसेफ कुओक, तत्कालीन सुपरिटेंडेंट, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) तुगलकाबाद, दिल्ली और अन्य आरोपियों पर कस्टम विभाग को करीब 58 लाख रुपये का चूना लगाने का आरोप था। जांच में सामने आया कि निर्यात से जुड़े ड्यूटी ड्रॉबैक के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।

M/s PS इंटरनेशनल के पार्टनर की संदिग्ध भूमिका

जांच के दौरान सरित विज की भूमिका उजागर हुई। वह M/s PS इंटरनेशनल नामक फर्म का पार्टनर था। आरोप है कि फर्म ने कस्टम विभाग से 19 लाख रुपये के ड्यूटी ड्रॉबैक का दावा झूठे और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर किया। इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धन हड़पने की कोशिश की गई। CBI ने जांच पूरी होने के बाद सरित विज समेत अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

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चार्जशीट के बाद भी अदालत में नहीं हुआ पेश

CBI अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2003 में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद आरोपी सरित विज कभी भी माननीय न्यायालय के समक्ष पेश नहीं हुआ। ट्रायल के दौरान उसे तलाशने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन वह लगातार फरार बना रहा। बार-बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद उसकी मौजूदगी सुनिश्चित नहीं हो सकी।

2004 में घोषित हुआ था भगोड़ा अपराधी

लगातार अनुपस्थिति और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 30 जनवरी 2004 को अदालत ने सरित विज उर्फ शरत कुमार विज को घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया। इसके साथ ही उसकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने पर 10,000 रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई थी। इसके बावजूद आरोपी वर्षों तक एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकता रहा।

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पहचान बदलकर रह रहा था नोएडा में

CBI की फील्ड वेरिफिकेशन और खुफिया जानकारी के आधार पर बड़ा खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि आरोपी ने अपनी पहचान बदल ली थी और अब वह शरत कुमार विज के नाम से रह रहा था। उसने न सिर्फ अपना नाम बदला, बल्कि पैन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे अहम दस्तावेज भी नए नाम से बनवा लिए थे। उसका नया आवासीय पता उत्तर प्रदेश के नोएडा में पाया गया।

तकनीकी निगरानी से रची गई गिरफ्तारी

CBI ने आरोपी की पहचान और लोकेशन की पुष्टि के लिए तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। डिजिटल ट्रेल, दस्तावेजों की जांच और अन्य तकनीकी इनपुट्स के जरिए एक सटीक ऑपरेशन की योजना बनाई गई। लंबे समय की निगरानी और सत्यापन के बाद 07 जनवरी 2026 को CBI की टीम ने नोएडा स्थित उसके नए ठिकाने पर दबिश दी और घोषित अपराधी को गिरफ्तार कर लिया।

26 साल पुराना मामला

CBI अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि अपराधी चाहे कितने भी साल फरार रहे, कानून के लंबे हाथ अंततः उसे पकड़ ही लेते हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब उसे संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 8 January 2026, 6:54 PM IST

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