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मैनपुरी के बरनाहल थाना क्षेत्र में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में विवेचना पर सवाल उठे हैं। पीड़ित ने लाखों रुपये के लेन-देन के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप लगाया है। एसपी मैनपुरी से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
पीड़ित ने एसपी से लगाई गुहार
Mainpuri: जनपद मैनपुरी के थाना बरनाहल क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां दर्ज एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना में पुलिस पर लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। पीड़ित राम मिलन पुत्र मेघ सिंह निवासी ग्राम डालूपुर थाना बरनाहल ने पुलिस अधीक्षक नगर मैनपुरी को एक शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उसके साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हुई है, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के चार माह बाद भी विवेचक द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
पीड़ित के अनुसार थाना बरनाहल में मु०अ०सं० 0043/2025 धारा 316(2), 351(3) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो अभियुक्तों से पूछताछ की गई है और न ही वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया गया है। इससे पीड़ित में भारी रोष है।
राम मिलन ने अपनी शिकायत में बताया कि अभियुक्तों द्वारा पेट्रोल पंप खोलने के नाम पर उसे बड़े निवेश का झांसा दिया गया। जमीन किराये पर लेकर 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी और लगभग 70 लाख रुपये निवेश करने का भरोसा दिलाया गया था। इसी आधार पर दोनों पक्षों के नाम से किरायानामा भी कराया गया, जिससे पीड़ित को पूरा भरोसा हो गया।
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शिकायत के अनुसार अभियुक्तों ने बैंक खातों के माध्यम से लाखों रुपये का लेन-देन कराया। पीड़ित का आरोप है कि एक खाते में करीब 74 लाख रुपये का संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आया है। इसके अलावा 11.25 लाख रुपये, 5.90 लाख रुपये और 3.72 लाख रुपये की रकम भी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई। पीड़ित का कहना है कि इन सभी लेन-देन से संबंधित बैंक स्टेटमेंट उसने पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
राम मिलन ने आरोप लगाया कि जब निवेश की पूरी रकम दी जा चुकी, तब अभियुक्तों ने पेट्रोल पंप में हिस्सेदारी देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने कई बार बातचीत और समझौते की कोशिश की, लेकिन उसे लगातार टालते हुए आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित का कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित धोखाधड़ी है।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि अभियुक्त श्याम सुंदर और प्रताप सिंह द्वारा विवेचना में सहयोग नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि वे बैंक स्टेटमेंट, जनरल डायरी (जीडी), किरायानामा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज पुलिस को देने से इनकार कर रहे हैं। इससे विवेचना प्रभावित हो रही है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि अभियुक्त दबाव बनाकर गवाहों को प्रभावित कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो गवाह पलट सकते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। पीड़ित ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
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पीड़ित का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद करीब चार माह बीत चुके हैं, लेकिन न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और न ही आर्थिक लेन-देन की गहन जांच की गई है। इससे पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।
पीड़ित राम मिलन ने पुलिस अधीक्षक नगर मैनपुरी से मांग की है कि उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अभियुक्तों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।