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प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Internet)
Pilibhit: पीलीभीत में दो दशक पुराने जमीन घोटाले और बैंक धोखाधड़ी के मामले में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। मामला ऐसा था जिसमें एक मृतक व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन को बंधक रखकर ट्रैक्टर लोन तक निकाल लिया गया। इस पूरे खेल में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी। लेकिन लंबे इंतजार के बाद अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जिससे इस केस ने एक नया मोड़ ले लिया है।
यह मामला थाना गजरौला क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां कोतवाली इलाके की रहने वाली चरन कौर ने न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, ग्राम मीरापुर एतमाली जहानाबाद की कृषि भूमि में उनका हिस्सा था, जिसमें सह-खातेदार के रूप में पाल सिंह का नाम दर्ज था। बताया गया कि पाल सिंह की मृत्यु साल 1999 में हो चुकी थी और वह इससे पहले ही 1981 में अपनी जमीन का बैनामा कर चुके थे। इसके बावजूद वर्षों बाद उनके नाम का इस्तेमाल कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया।
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आरोप था कि साल 2005 में एक व्यक्ति जसवंत सिंह ने खुद को पाल सिंह बताकर फर्जी पहचान बनाई। उसने फोटो और कागजात के जरिए अपनी पहचान साबित करते हुए बैंक से संपर्क किया। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा कैच, गजरौला के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।
इस मामले में बैंक के शाखा प्रबंधक पीएल तौलिया और फील्ड ऑफिसर केपी सिंह समेत अन्य लोगों पर आरोप लगे कि उन्होंने जांच-पड़ताल किए बिना लोन पास कर दिया। पीड़ित पक्ष का कहना था कि यह सब जानबूझकर आर्थिक लाभ के लिए किया गया और जमीन मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
मामले में पुलिस ने जांच कर अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की, जिसमें आरोपियों को दोषी नहीं पाया गया। हालांकि, शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट का विरोध किया और प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की। इसके बाद अदालत ने मामले को परिवाद के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने पूरे मामले की सुनवाई और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने चरन सिंह उर्फ चन्ना, शाखा प्रबंधक पीएल तौलिया और फील्ड ऑफिसर केपी सिंह के खिलाफ आरोप सिद्ध न होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
Location : Pilibhit
Published : 15 April 2026, 8:41 PM IST