Legal News: उधार के पैसे मांगना अपराध नहीं, जानें किस मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि उधार दिए गए पैसे वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने कोल्हापुर के एक शिक्षक की आत्महत्या मामले में छह आरोपियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 2 June 2026, 2:37 PM IST
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Mumbai: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति से उधार दिए गए पैसे वापस मांगना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक स्कूल शिक्षक की आत्महत्या से जुड़े मामले में छह आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला कोल्हापुर के रहने वाले शिक्षक दिलीप मांडे की मौत से जुड़ा है। आरोप था कि उन्होंने कुछ लोगों से उधार लिया था और बाद में ऋण वसूली के लिए लगातार दबाव बनाए जाने के कारण उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अमित मोरे समेत छह लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया था।

धारा 306 को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला तभी बनता है जब आरोपी का स्पष्ट और जानबूझकर किया गया ऐसा आचरण हो, जिससे पीड़ित को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित या मजबूर किया गया हो। केवल पैसे की मांग करना या उधार चुकाने के लिए बार-बार याद दिलाना इस श्रेणी में नहीं आता।

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'पैसे मांगना अपराध नहीं'

जस्टिस रंजीत सिंह राजा भोंसले की पीठ ने कहा कि उधार देने वाले द्वारा अपना पैसा वापस मांगना एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऋण की वसूली के लिए संपर्क करना या भुगतान की याद दिलाना आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार मामले में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि आरोपियों ने जानबूझकर मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया था।

एफआईआर में नहीं मिले पर्याप्त आधार

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 306 लागू करने के लिए जिस आपराधिक मंशा की आवश्यकता होती है, वह एफआईआर में लगाए गए आरोपों से स्पष्ट नहीं होती। ऐसे में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

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आरोपियों को मिली बड़ी राहत

कोर्ट ने अमित मोरे और अन्य पांच आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इस फैसले को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।

Location :  Mumbai

Published :  2 June 2026, 2:37 PM IST

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