वोटों का खेल या बजट का दिवाला? चुनाव खत्म होते ही लाडकी बहिन योजना पर चली कैंची, 81 लाख महिलाएं लिस्ट से साफ!

महाराष्ट्र में 'लाडकी बहिन' योजना को लेकर महायुति और विपक्ष में आर-पार की जंग छिड़ गई है। e-KYC के बाद 81 लाख महिलाओं को योजना से बाहर किए जाने और ₹3541 करोड़ के अतिरिक्त खर्च पर संजय राउत ने मंत्रियों की संपत्ति जब्त करने की मांग की है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 14 July 2026, 3:25 PM IST
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Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति में मुफ्त योजनाओं और चुनावी वादों का 'हनीमून पीरियड' अब खत्म होता नजर आ रहा है। चुनाव बीतने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के खजाने को संभालने की आ खड़ी हुई है। यही वजह है कि राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कैंची चली है।

व्यापक e-KYC वेरिफिकेशन प्रोसेस के नाम पर सरकार ने एक झटके में करीब 81 लाख लाभार्थियों को सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिसके बाद विपक्ष ने इसे वोट बैंक की राजनीति और वित्तीय धोखाधड़ी करार दिया है।

e-KYC का हथियार या खजाने को बचाने की मजबूरी?

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने इस बड़े एक्शन का बचाव करते हुए इसे एक शुद्धीकरण अभियान बताया है। उनके मुताबिक, योजना की शुरुआत में 2.63 करोड़ रजिस्ट्रेशन हुए थे, जिनमें से 2.47 करोड़ महिलाएं पात्र पाई गईं।

लेकिन जब विभाग ने गहराई से e-KYC वेरिफिकेशन शुरू किया, तो अयोग्य आवेदकों की परतें खुलने लगीं। इस फिल्टर के बाद अब लाभार्थियों का आंकड़ा घटकर करीब 1.67 से 1.7 करोड़ रह गया है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे सरकार द्वारा बजट को री-बैलेंस करने की मजबूरी के तौर पर भी देख रहे हैं।

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संजय राउत का तीखा वार

इतनी भारी संख्या में महिलाओं का पत्ता कटने से भड़के शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता संजय राउत ने सरकार के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना सिर्फ 2024 के विधानसभा चुनावों में वोट बटोरने का एक हथकंडा थी।

राउत ने अधिकारियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा, "इनकी निजी संपत्ति जब्त की जानी चाहिए और जनता के पैसे की वसूली होनी चाहिए।" उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में यह योजना पूरी तरह ठप कर दी जाएगी।

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कांग्रेस ने पूछा- लुटेरों का गिरोह है क्या?

इस पूरे विवाद में केवल महिलाओं को हटाने का गुस्सा नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के वित्तीय मिसमैनेजमेंट का मुद्दा भी गरमा गया है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि योजना के लिए स्वीकृत 29,693 करोड़ रुपये के बजट से 3,541 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च कर दिए गए, जिसका सरकारी रिकॉर्ड में कोई हिसाब-किताब ही नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह सरकार चल रही है या लुटेरों का कोई गिरोह? ₹1500 प्रति महीने की इस योजना ने अब महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है।

Location :  Mumbai

Published :  14 July 2026, 3:25 PM IST

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