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प्रतीकात्मक छवि (Img- Pinterest)
Lucknow: देश में 'एक देश-एक चुनाव' की दिशा में कदम तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं। इस संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद पीपी चौधरी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि साल 2029 में पूरे देश में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ आयोजित कराए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए देश के मौजूदा कानूनों में भी जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं।
जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने इस व्यवस्था को देश के लिए व्यावहारिक बताते हुए इतिहास का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत में साल 1952 से लेकर 1967 तक लगातार चार बार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही संपन्न कराए गए थे। चौधरी ने कहा कि उस दौर में जब हमारे पास आज जैसा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) भी मौजूद नहीं था, तब भी यह संभव हो सका था। आज के समय में देश तकनीकी और संसाधनों के मामले में काफी आगे निकल चुका है और हमारे पास चुनाव संपन्न कराने के लिए पर्याप्त संख्या में ईवीएम (EVM) भी उपलब्ध हैं। ऐसे में अब इसे दोबारा लागू करने में कोई बड़ी बाधा नहीं है।
विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे इस सवाल पर कि 'एक चुनाव की अवधारणा देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है', जेपीसी अध्यक्ष ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव की समय-सारिणी एक कर देने से संघीय ढांचे की भावना को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है। 50 और 60 के दशक में एक साथ हुए चुनावों का इतिहास खुद इस बात का सबसे बड़ा सबूत है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें संसाधनों की कमी की बात कही जा रही थी। चौधरी ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए देश के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
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जब पीपी चौधरी से यह सवाल पूछा गया कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा बिल पहले लोकसभा में गिर चुका है, तो उन्होंने इस पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि इस बार सरकार पूरे होमवर्क के साथ और जरूरी बहुमत जुटाते हुए इस बिल को संसद में लेकर आएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार बिल को लेकर पहले जैसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होगी और इसे सफलतापूर्वक पारित करा लिया जाएगा।
Location : Lucknow
Published : 15 July 2026, 3:07 PM IST