सीतापुर में बाघ का आतंक जारी, किसान की मौत के 25 दिन बाद भी पकड़ से बाहर, जंगल से खेत तक फैला वन विभाग का जाल

सीतापुर में किसान की मौत के बाद बाघ की तलाश का ऑपरेशन लगातार जारी है। 15 जुलाई से शुरू हुए अभियान में छह वन रेंजों की टीमें, दुधवा की विशेषज्ञ टीम, ड्रोन और कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। कई प्रयासों के बावजूद बाघ अभी तक पकड़ से बाहर है और ग्रामीणों में डर बना हुआ है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 9 August 2026, 5:48 PM IST
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Sitapur: सीतापुर जिले में बाघ का खौफ अब भी बना हुआ है। करीब 25 दिन पहले गन्ने के खेत में किसान पर हुए जानलेवा हमले के बाद वन विभाग लगातार बाघ की तलाश में जुटा है, तमाम कोशिशों के बावजूद बाघ पकड़ से बाहर है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चला रखा है। छह वन रेंजों की टीमें, दुधवा टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

15 जुलाई को गन्ने के खेत में हुआ था हमला

मामला ग्राम सभा मधवापुर के मजरा रसुलवा का है। 15 जुलाई 2026 को 52 वर्षीय किसान गन्ने के खेत में घास काटने गया था। इसी दौरान बाघ ने उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और बाघ की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में कॉम्बिंग अभियान शुरू किया गया। कॉम्बिंग के दौरान मिले पगचिन्हों और अन्य सबूतों से क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई।

कमांड सेंटर बनाकर चलाया जा रहा अभियान

बाघ की निगरानी और ऑपरेशन को नियंत्रित करने के लिए मधवापुर पंचायत भवन में कमांड सेंटर बनाया गया है। यहां से पूरे अभियान की निगरानी की जा रही है। वन विभाग की टीमें मधवापुर, सिसेंडी, गेंधारिया, सरायन नदी के आसपास के इलाकों और विजवामऊ वनखंड में लगातार गश्त कर रही हैं। बाघ की गतिविधियों को पकड़ने के लिए थर्मल ड्रोन, कैमरा ट्रैप और आईआर कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा दो जगहों पर पिंजरे भी लगाए गए हैं।

पड़वा का शिकार करने के बाद भी नहीं आया पकड़ में

बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञ ट्रैकिंग और ट्रैंकुलाइजिंग टीम को बुलाया गया। विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की निगरानी में बाघ को पकड़ने के लिए पड़वा बांधकर ओपन बेट लगाया गया और ट्रैंकुलाइजेशन के लिए मचान तैयार किया गया। 20 जुलाई को बाघ ने पड़वे का शिकार कर लिया, लेकिन इसके बाद भी वह वन विभाग की पकड़ में नहीं आया। निगरानी के दौरान अगले दिन बाघ को मृत पड़वे के आसपास देखा गया, लेकिन वह दोबारा उस स्थान पर नहीं लौटा। इसके बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में फिर से कॉम्बिंग अभियान तेज कर दिया।

4 अगस्त को मिले ताजा पगचिन्ह

लगातार तलाश के बीच 4 अगस्त को गेंधारिया वनखंड के पास बाघ के ताजा पगचिन्ह मिले। इसके बाद वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोबारा ओपन बेट लगाया। दुधवा से आई विशेषज्ञ टीम ने बाघ को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन इस बार भी बाघ ने बेट के पास आने से दूरी बनाए रखी और इलाके की रेकी करने के बाद वहां से निकल गया।

ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील

बाघ की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है। वन विभाग की ओर से गांवों में पीए सिस्टम और ई-रिक्शा के माध्यम से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वह अकेले खेतों में न जाएं, खासकर सुबह और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें। किसी भी वन्यजीव की गतिविधि नजर आने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें। गांवों में बैठकें कर लोगों को सुरक्षा उपायों की जानकारी भी दी जा रही है।

खेत, नदी और जंगल में जारी है निगरानी

वर्तमान में बाघ की तलाश का मुख्य क्षेत्र गन्ने के खेत, सरायन नदी के आसपास का इलाका और विजवामऊ वनखंड बना हुआ है। सुबह और शाम थर्मल ड्रोन से निगरानी की जा रही है। कैमरा ट्रैप और आईआर कैमरों से बाघ की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की कोशिश की जा रही है। वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ना और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बाघ लगातार अपना स्थान बदल रहा है, जिससे ऑपरेशन और मुश्किल हो रहा है।

25 दिन बाद भी चुनौती बरकरार

15 जुलाई की घटना से शुरू हुआ यह अभियान अब 9 अगस्त तक जारी है। किसान की मौत के बाद ग्रामीणों की नजरें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। फिलहाल छह रेंजों की टीमें, दुधवा की विशेषज्ञ टीम, ड्रोन टीम और जमीनी गश्ती दल बाघ की तलाश में जुटे हैं। अब देखना होगा कि वन विभाग कब तक इस बाघ को पकड़कर ग्रामीणों को दहशत से राहत दिला पाता है।

Location :  Sitapur

Published :  9 August 2026, 5:48 PM IST

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