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यूपी में दौड़ेंगी बसें (IMG: Gemini)
Lucknow: गांवों में सफर करने वालों की मुश्किलें जल्द बदल सकती हैं। जिस तरह शहरों में टैक्सी, बाइक और थ्री-व्हीलर को एक नए सहकारी मॉडल से जोड़ने की शुरुआत हुई है, अब उसी मॉडल को गांवों की सड़कों तक ले जाने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण बस सेवा को भी इसी तर्ज पर विकसित करने की बात सामने आई है। यानी आने वाले समय में गांवों में बस चलाने वाले स्थानीय युवाओं को परिवहन व्यवस्था से जोड़ने के साथ उनकी कमाई और सामाजिक सुरक्षा पर भी फोकस किया जा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्तावित ग्रामीण बस सेवा को भारत टैक्सी के मॉडल पर विकसित करने की बात कही है।
भारत टैक्सी की सबसे खास बात इसका जीरो कमीशन मॉडल बताया जा रहा है। इस व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन कराकर सेवा से जुड़ने वाले ड्राइवर को अपनी हर राइड की कमाई में से प्लेटफॉर्म को कमीशन नहीं देना होगा। इसके साथ ड्राइवरों को पांच लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज देने की बात भी कही गई है। सरकार की ओर से इस मॉडल को केवल कैब बुकिंग सेवा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे सहकारिता के जरिए ड्राइवरों को परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनाने का विचार है। कार्यक्रम के दौरान कुछ सारथियों को भारत टैक्सी के शेयर प्रमाण पत्र भी सौंपे गए।
शहरों में भारत टैक्सी की शुरुआत के साथ ही इसके ग्रामीण विस्तार की दिशा भी सामने रखी गई है। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित ग्रामीण बस सेवा को भारत टैक्सी के मॉडल पर विकसित करने का आह्वान किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्रामीण परिवहन को भी रोजगार और सहकारिता से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। अगर यह मॉडल ग्रामीण बस सेवा में लागू होता है तो गांवों से ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक आने-जाने वाले लोगों को परिवहन का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। इसके साथ स्थानीय स्तर पर बस चलाने वाले युवाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खुल सकता है।
भारत टैक्सी को लेकर सरकार का फोकस केवल यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित नहीं है। इसे रोजगार, परिवहन और सहकारिता को जोड़ने वाले मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है। इसमें टैक्सी के अलावा बाइक और थ्री-व्हीलर चालकों को भी शामिल किया गया है। इससे अलग-अलग तरह के स्थानीय परिवहन साधनों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश है। सरकार का कहना है कि अगर इस मॉडल का प्रभावी तरीके से विस्तार किया जाता है तो यह बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता है।
ग्रामीण परिवहन और रोजगार के मॉडल को समझाने के लिए प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव का भी उल्लेख किया गया। महाकुंभ के दौरान बाइक टैक्सी ने यात्रियों को रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे स्थानों से आगे पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। बड़े आयोजन में स्थानीय परिवहन की जरूरत को देखते हुए बाइक टैक्सी जैसे साधनों का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह के अनुभव से यह विचार सामने आया कि स्थानीय युवाओं और परिवहन साधनों को एक व्यवस्थित मॉडल से जोड़ा जाए। अब इसी सोच को शहर से गांव तक ले जाने की तैयारी है।
भारत टैक्सी को शुरुआती चरण में ही कई संस्थाओं से जोड़ने की कोशिश की गई है। लखनऊ एयरपोर्ट, लखनऊ मेट्रो और लखनऊ पुलिस के साथ एमओयू किए गए हैं। इससे सेवा को अलग-अलग परिवहन और सार्वजनिक संस्थाओं के साथ जोड़ने का रास्ता तैयार हुआ है। फिलहाल सेवा लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में शुरू की गई है। आगे इसका विस्तार दूसरे क्षेत्रों में करने की संभावना है। इसी विस्तार के साथ ग्रामीण बस सेवा को भी भारत टैक्सी के मॉडल से जोड़ने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कई जगहों पर नियमित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता है। ऐसे में अगर प्रस्तावित ग्रामीण बस सेवा प्रभावी तरीके से लागू होती है तो गांवों से बाजार, ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंच आसान हो सकती है। वहीं, स्थानीय युवाओं को बस संचालन से जोड़ने का मॉडल रोजगार का एक नया माध्यम बन सकता है। हालांकि इस मॉडल को जमीन पर लागू करने के लिए रूट, बसों की संख्या, परमिट, किराया, चालक की आय, सामाजिक सुरक्षा और निगरानी जैसे कई पहलुओं को स्पष्ट करना होगा।
Location : Lucknow
Published : 23 September 2026, 6:42 PM IST