आसमान बना मौत का साया, आंधी-तूफान ने ली जानें, पूर्वांचल में तबाही का मंजर

पूर्वांचल में पश्चिमी विक्षोभ के कारण आए भीषण तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं और बिजली गिरने से कई लोगों की मौत हो गई, जबकि हजारों गांवों की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। मिर्जापुर, वाराणसी, बलिया और आजमगढ़ समेत कई जिलों में भारी नुकसान दर्ज किया गया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 30 May 2026, 1:29 PM IST
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Lucknow: पूर्वांचल का मौसम शुक्रवार को अचानक ऐसे बदला कि पूरा इलाका मानो किसी प्राकृतिक “क्राइम सीन” में बदल गया हो। तेज हवाओं, बिजली की कड़क और मूसलाधार बारिश ने जहां एक तरफ लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी तरफ यह राहत कई परिवारों के लिए मौत का कारण बन गई। पश्चिमी विक्षोभ के असर से पैदा हुए इस तूफानी सिस्टम ने कई जिलों में कहर बरपा दिया। कहीं बिजली गिरने से जानें गईं तो कहीं हवा के झोंकों ने छतों से लोगों को नीचे पटक दिया। पूरी रात और सुबह तक लोग अंधेरे, टूटे खंभों और गिरते पेड़ों के बीच दहशत में जीते रहे।

मौसम का अचानक बदला मिजाज

Varanasi सहित पूर्वांचल के 10 जिलों में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली। वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, मऊ, आजमगढ़ और चंदौली में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। कई इलाकों में काले बादल ऐसे छा गए जैसे दिन में ही रात हो गई हो। धूल भरी आंधी और गरज-चमक के बीच बारिश ने लोगों को तो राहत दी, लेकिन इसके पीछे छिपा खतरा बेहद जानलेवा साबित हुआ।

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बिजली गिरने से मौतें

आजमगढ़ में धर्मराज राजभर (50) की बिजली गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। वहीं बलिया में इंद्रजीत यादव (75) भी आसमानी बिजली की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे। ये घटनाएं सिर्फ हादसे नहीं थीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक ऐसा झटका थीं, जिसने उनकी पूरी जिंदगी को उजाड़ दिया। गांवों में मातम पसरा हुआ है और लोग अब भी उस मंजर को याद कर सिहर उठते हैं।

छत से गिरकर भी गई जान

भदोही में हवा इतनी तेज थी कि एक व्यक्ति राजकुमार पाल (42) अपनी छत से संतुलन खो बैठा और नीचे गिरकर उसकी मौत हो गई। यह घटना बताती है कि इस तूफान ने सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि हवा के जरिए भी जानलेवा रूप दिखाया।

हजारों गांव अंधेरे में

तेज आंधी ने बिजली व्यवस्था की रीढ़ ही तोड़ दी। वाराणसी, जौनपुर और चंदौली में सैकड़ों खंभे गिर गए, ट्रांसफार्मर फुंक गए और तार जगह-जगह टूट गए। करीब 2000 से ज्यादा स्थानों पर पेड़ और बिजली के पोल गिरने से आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। कई गांवों में 6 घंटे से अधिक समय तक अंधेरा छाया रहा।

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मिर्जापुर में सबसे ज्यादा नुकसान

मिर्जापुर में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक 1500 से अधिक घरों और दुकानों के टिनशेड उड़ गए। 275 बिजली के खंभे और 47 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। गांवों में टूटी हुई छतें, बिखरे मलबे और गिरे पेड़ इस बात की गवाही दे रहे थे कि तूफान कितना भयावह था।

फसलों और पशुओं को भी भारी नुकसान

सोनभद्र और गाजीपुर में जायद की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगह आम के बागानों में पेड़ टूट गए। सोनभद्र में करंट की चपेट में आने से सात पशुओं की मौत हो गई, जबकि चंदौली में दो भैंसों की जान चली गई। किसानों के लिए यह तूफान किसी आर्थिक आपदा से कम नहीं है।

आगरा में ऐतिहासिक स्मारकों को भी नुकसान

शुक्रवार शाम आए तूफान ने सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि आगरा को भी हिला दिया। तेज हवाओं से ताजमहल, आगरा किला, एत्माद्दौला और रामबाग जैसे ऐतिहासिक स्थलों की रेलिंग गिर गई और पेड़ों की शाखाएं टूट गईं। स्मारकों को हुए नुकसान के बाद अब उनकी जांच और सर्वे की तैयारी शुरू कर दी गई है।

प्रशासन अलर्ट

मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 24 घंटे तक कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। प्रशासन को सतर्क रहने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

Location :  Lucknow

Published :  30 May 2026, 1:29 PM IST

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