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लोकसभा में ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। एलपीजी संकट और छोटे व्यापारियों की परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
लोकसभा में ऊर्जा संकट को लेकर गरजे राहुल गांधी
New Delhi: देश की संसद में गुरुवार को उस वक्त माहौल अचानक गरमा गया जब ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरान-इस्राइल युद्ध और उससे पैदा हुए हालात का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। राहुल गांधी के इस बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया और सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया। स्थिति ऐसी हो गई कि स्पीकर को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा और राहुल गांधी को नियमों के दायरे में बोलने की नसीहत देनी पड़ी।
लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। उनके मुताबिक अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि अगर इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो यह पूरी दुनिया के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है और भारत की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से आता है।
सदन में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ऊर्जा संकट का असर सबसे पहले आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि देश में एलपीजी को लेकर लोगों के बीच घबराहट का माहौल बन रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे व्यापारी पहले ही आर्थिक दबाव में हैं। अगर गैस और ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई प्रभावित होती है तो सबसे ज्यादा मुश्किल इन्हीं लोगों को झेलनी पड़ेगी।
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अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने अमेरिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश को यह तय करने का पूरा अधिकार होना चाहिए कि वह किस देश से तेल और गैस खरीदेगा। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि कोई दूसरा देश यह तय करे कि भारत को किससे ऊर्जा खरीदनी चाहिए और किससे नहीं। राहुल गांधी ने कहा कि अगर अमेरिका यह तय करता है कि भारत रूस से तेल खरीद सकता है या नहीं, तो यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर सवाल खड़ा करता है।
संसद में राहुल गांधी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह बात हमेशा उन्हें उलझन में डालती है कि भारत जैसा बड़ा और ताकतवर देश किसी दूसरे देश को यह अधिकार क्यों दे कि वह तय करे कि भारत किससे तेल खरीदेगा। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति और ऊर्जा नीति देश के हितों के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि किसी बाहरी दबाव के आधार पर।
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राहुल गांधी के बयान के बाद सदन में माहौल अचानक गर्म हो गया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने उनके बयान का जोरदार विरोध करना शुरू कर दिया और ट्रेजरी बेंच की ओर से शोरगुल बढ़ गया। हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल गांधी को टोकते हुए कहा कि उन्होंने जिस विषय पर नोटिस दिया है, उसी पर बात करनी चाहिए। स्पीकर ने साफ कहा कि सदन में नियमों से हटकर बोलने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। इसके बाद कुछ देर तक सदन में हंगामा जारी रहा।