दिल्ली में जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र का कब्जा, इंडियन पोलो एसोसिएशन के साथ और गहराया विवाद

दिल्ली के बेहद चर्चित जयपुर पोलो ग्राउंड को लेकर केंद्र सरकार और इंडियन पोलो एसोसिएशन के बीच विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अदालत से राहत न मिलने के बाद सरकार ने ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे मामले को और गर्मा दिया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 June 2026, 4:49 PM IST
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New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित रेस कोर्स क्षेत्र में स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को लेकर केंद्र सरकार और इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत से अंतरिम राहत न मिलने के बाद केंद्र सरकार ने इस बहुचर्चित संपत्ति पर अपना नियंत्रण स्थापित करते हुए आधिकारिक तौर पर कब्जा लेने की कार्रवाई कर दी है।

जयपुर पोलो ग्राउंड परिसर में केंद्र सरकार की ओर से नोटिस लगाया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह भूमि भारत सरकार की संपत्ति है। नोटिस में किसी भी प्रकार के अनधिकृत कब्जे, निर्माण या दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

एलएंडडीओ ने जारी किया आधिकारिक नोटिस

लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) द्वारा लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भूमि केंद्र सरकार के स्वामित्व में है और इस पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी नोटिस लगने के बाद यह साफ संकेत मिल गया कि केंद्र सरकार ने जमीन पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इस संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है।

IPA ने बेदखली आदेश को दी थी चुनौती

इंडियन पोलो एसोसिएशन ने 20 मई 2026 को जारी किए गए बेदखली आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। एसोसिएशन का कहना था कि उसे परिसर खाली करने के आदेश के खिलाफ राहत मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से आईपीए ने दिल्ली हाई कोर्ट और बाद में संबंधित अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया। हालांकि अब तक उसे किसी भी स्तर पर अंतरिम राहत नहीं मिल सकी है।

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केंद्र ने बताई सार्वजनिक और रक्षा जरूरत

अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस जमीन की आवश्यकता सार्वजनिक हित और रक्षा संबंधी कार्यों के लिए है। सरकार की ओर से पेश किए गए पक्ष में कहा गया कि मध्य दिल्ली में उपलब्ध जमीन बेहद सीमित है और ऐसे में इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का उपयोग सरकारी एवं राष्ट्रीय जरूरतों के लिए किया जाना आवश्यक है।

अदालत ने रोक लगाने से किया इनकार

12 जून को पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। वेकेशन जज धीरेंद्र राणा ने आईपीए की उस अपील पर विचार किया, जिसमें बेदखली आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि संबंधित भूमि के संबंध में कोई वैध लीज मौजूद नहीं है और बेदखली आदेश रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी माना कि 20 मई को पारित आदेश के बाद अपील 3 जून को दाखिल की गई थी और इस दौरान किसी भी अदालत ने आईपीए को अंतरिम सुरक्षा नहीं दी थी।

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हाई कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 जून को आईपीए की याचिका का निस्तारण कर दिया था। हालांकि हाई कोर्ट ने भी किसी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं दी और मामले को अपीलीय अदालत के समक्ष छोड़ दिया था। न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए वेकेशन जज ने भी बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून 2026 को निर्धारित की गई है।

Location :  New Delhi

Published :  13 June 2026, 4:48 PM IST

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