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शेर सिंह हत्याकांड में आरोपी को उम्रकैद की सजा (Img: AI Generated)
Aligarh : पांच साल पहले मजदूर शेर सिंह की हुई हत्या के मामले में अदालत ने मनीष उर्फ सांप को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या का तरीका और वारदात के बाद की परिस्थितियां ऐसी थीं, जिन्हें अदालत ने बेहद गंभीर माना। बचाव पक्ष ने आरोपी की कम उम्र और पारिवारिक स्थिति का हवाला देकर सजा में नरमी की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को अपराध की गंभीरता के सामने पर्याप्त नहीं माना।
मामला बन्नादेवी क्षेत्र का है। सात नवंबर 2021 की रात बरौला जाफराबाद निवासी मजदूर शेर सिंह काम के सिलसिले में घर से निकला था। देर रात तक वापस नहीं आने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन उसका शव बैकुण्ठी देवी के प्लाट में पड़ा मिला।
शेर सिंह के गले में प्लास्टिक की रस्सी का फंदा था। उसके मुंह में पन्नियों में गुटखे का बंडल ठूंसा गया था। आंखों के नीचे चोट के निशान भी मिले थे। घटना के बाद मृतक के भाई मुन्नालाल की तहरीर पर बन्नादेवी थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस की विवेचना आगे बढ़ी तो मामले में मनीष उर्फ सांप का नाम सामने आया। शेर सिंह के अनुसूचित जाति से होने के कारण मुकदमे में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) भी जोड़ी गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया। मुकदमे में 16 गवाह सूचीबद्ध किए गए थे, जिनमें नौ की गवाही हुई। 31 अगस्त 2026 को बचाव पक्ष की ओर से साक्ष्य पूरा किया गया।
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सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने मनीष की उम्र करीब 24 वर्ष बताते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। यह भी कहा गया कि उसकी मां के अलावा परिवार में कोई सहारा नहीं है और वह अभी अविवाहित है। दूसरी ओर अभियोजन ने हत्या के तरीके और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए कड़ी सजा की मांग की। अदालत ने माना कि आरोपी की उम्र और सुधार की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन इस मामले में अपराध की गंभीरता ज्यादा महत्वपूर्ण है।
एडीजे विशेष एससी/एसटी प्रतिभा सक्सेना की अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि शेर सिंह के साथ हिंसात्मक व्यवहार किया गया और उसे मारते-घसीटते हुए ले जाया गया। शव का खुले प्लाट में मिलना भी मामले की गंभीर परिस्थितियों में शामिल रहा।
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अदालत ने मनीष उर्फ सांप को धारा 302 आईपीसी के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) में भी आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोनों धाराओं में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। करीब पांच साल पुराने इस मामले में आए फैसले ने अब उस रात की वारदात से जुड़े कई सवालों को एक कानूनी अंजाम दे दिया है।
Location : Aligarh
Published : 7 October 2026, 1:18 PM IST