DN Exclusive: 12 साल बाद फिर जागेगी हिमालय की देवी, इन खूबसूरत पड़ावों से होकर गुजरेगी राजजात यात्रा

280 किलोमीटर की राजजात यात्रा सिर्फ रास्तों की कहानी नहीं है। यहां हर मोड़ पर नियम बदलते हैं, गांव खत्म होते हैं और विश्वास शुरू होता है। जहां इंसान नहीं, परंपराएं तय करती हैं कि अगला कदम रखा भी जाए या नहीं।आइए ऐसे में जानते हैं कि राजजात यात्रा कहां-कहां से होकर जाती है?

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 29 January 2026, 4:39 PM IST
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Chamoli: अगर उत्तराखंड की आत्मा को करीब से समझना हो, तो नंदा देवी राजजात यात्रा को जानना जरूरी है। यह कोई आम धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है, जो हर 12 साल में एक बार चमोली जिले में निकलती है। इस यात्रा में माता नंदा देवी को उनके मायके नौटी गांव से हिमालय के दुर्गम क्षेत्र तक विदा किया जाता है। करीब 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा गांव-गांव, बुग्यालों और बर्फीले पहाड़ों से होकर गुजरती है, जहां सड़कें खत्म हो जाती हैं लेकिन आस्था और विश्वास आगे बढ़ते रहते हैं।

इस यात्रा की खास बात यह है कि हर पड़ाव का अपना नियम, मान्यता और कहानी है। कहीं पूजा के बिना आगे बढ़ना मना है, तो कहीं रात रुकने की इजाजत नहीं होती। यही वजह है कि राजजात यात्रा सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि समझने और महसूस करने का अनुभव है। पर क्या आप जानते हैं कि यह यात्रा कहां-कहां से होकर गुजरती है ? अगर नहीं, तो आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं।

यात्रा की शुरुआत

राजजात यात्रा की शुरुआत चमोली जिले के नौटी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर से होती है। मान्यता है कि यहीं से माता नंदा देवी की डोली हिमालय की कठिन यात्रा पर निकलती है। नौटी को इस यात्रा की आत्मा कहा जाता है, क्योंकि यहां के राजवंश को सदियों से राजजात की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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प्रमुख पड़ाव और पारंपरिक मार्ग

नौटी से प्रारंभ होने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण गांवों और पड़ावों से होकर गुजरती है। यह यात्रा नौटी से शुरू होकर ईड़ा बधाणी जाती है, इसके बाद कांसुवा से सेम और फिर कोटी पहुंचती है। कोटी पहुंचने के बाद भगोती और कुलसारी होते हुए नंदकेशरी आती है, जहां परंपरागत रूप से भव्य पूजन और अनुष्ठान संपन्न होते हैं। आगे यात्रा फल्दिया गांव, मुंदोली से गुजरकर वाण पहुंचती है, जिसे अंतिम मानव बस्ती माना जाता है। वाण के बाद यात्रा दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश करती है, जहां से आगे का मार्ग पूरी तरह प्राकृतिक और कठिन हो जाता है।

Nanda Devi Raj Jaat

नंदा देवी राजजात (Img- Internet)

इसके पश्चात यात्रा गैरोली पातल होते हुए लगभग 14,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित वेदनी बुग्याल पहुंचती है, जहां देवी नंदा की विशेष पूजा होती है। यहीं से राजजात का सबसे कठिन चरण शुरू होता है, जिसमें यात्रा पातर नौचौणियां, भागवाबासा और अंततः शिला विनायक तक जाती है। लोकमान्यता के अनुसार शिला विनायक को यात्रा का आध्यात्मिक द्वार माना जाता है और यहां विधिवत अनुमति व पूजा के बिना आगे बढ़ना वर्जित समझा जाता है।

रूपकुंड: रहस्य और आस्था का संगम

इसके बाद यात्रा पहुंचती है रूपकुंड, जिसे कंकाल झील के नाम से भी जाना जाता है। रिसर्च के अनुसार यहां पाए गए मानव अवशेष 9वीं-10वीं सदी के माने जाते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग देवी के कोप से जोड़कर देखते हैं। राजजात के दौरान यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं, जो इस स्थान को और रहस्यमय बना देते हैं।

कहां होता है समापन?

यात्रा का अंतिम पड़ाव होमकुंड है। मान्यता है कि यहीं माता नंदा देवी अपने लोक में लौटती हैं। यहां होने वाले अंतिम अनुष्ठानों के बाद राजजात का समापन होता है।

नौटी से होमकुंड तक 280 किमी आस्था की पदयात्रा (Img- Internet)

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वापसी का मार्ग

होमकुंड से वापसी यात्रा लाटा खोपड़ी, सुतोल और घाट होते हुए पुनः नौटी पहुंचती है। यह वापसी मार्ग भी उतना ही धार्मिक महत्व रखता है, जितना मुख्य यात्रा पथ।

चौसिंग्या खाडू

इस यात्रा का सबसे अनोखा आकर्षण होता है चौसिंग्या खाडू यानी चार सींगों वाला भेड़ा। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह भेड़ा स्वयं देवी की इच्छा से यात्रा में शामिल होता है और पूरे मार्ग में आगे-आगे चलता है। यदि यह रास्ता बदल ले, तो यात्रा को वहीं रोक दिया जाता है।

नंदा देवी राजजात यात्रा को लेकर अहम फैसला

नंदा देवी राजजात यात्रा वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी। इसकी घोषणा नंदा देवी मंदिर, नौटी में राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने की। बता दें कि पहले यह यात्रा इस साल 2026 में होने वाली थी, पर बसंत पंचमी के दिन यह समिति द्वारा यह फैसला लिया गया है कि यह यात्रा 2027 में होगी ताकि सरकार एक साल के अंदर यात्रा मार्ग पर सही व्यवस्था कर सके। इस दौरान चमोली के डीएम और एसपी भी मौजूद रहे।

Location : 
  • Chamoli

Published : 
  • 29 January 2026, 4:39 PM IST

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