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गोरखपुर में वर्ष 2022 के हत्या और हत्या के प्रयास के चर्चित मामले में न्यायालय ने अभियुक्त आलोक पासवान को आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। पुलिस की प्रभावी पैरवी और “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। फैसले को गंभीर अपराधों पर सख्त कार्रवाई का बड़ा संदेश माना जा रहा है।
ऑपरेशन कनविक्शन की बड़ी सफलता
Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर में थाना खोराबार क्षेत्र के वर्ष 2022 के हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए अभियुक्त आलोक पासवान को दोषी करार दिया। न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 35,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाह अभियोजन के आरोपों को प्रमाणित करते हैं, जिसके आधार पर कठोर दंड आवश्यक है।
यह निर्णय पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के तहत प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य गंभीर अपराधों में शीघ्र और सुनिश्चित सजा दिलाना है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों में कानून का भय बना रहे।
अभियुक्त आलोक पासवान पुत्र जवाहरलाल निवासी रैना थाना खलीलाबाद जनपद संत कबीर नगर के खिलाफ थाना खोराबार में वर्ष 2022 में कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें मु0अ0सं0 138/2022 धारा 302 और 428 भादवि के तहत हत्या, मु0अ0सं0 139/2022 धारा 307, 392 और 411 भादवि के तहत हत्या का प्रयास, लूट और अन्य अपराध शामिल थे। इसके अलावा मु0अ0सं0 140/2022 धारा 7/25 आर्म्स एक्ट और मु0अ0सं0 141/2025 धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटनास्थल से जुड़े भौतिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों ने आरोपी की भूमिका को स्पष्ट किया, जिसके बाद अदालत ने उसे दोषी मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में थाना खोराबार की पैरोकार टीम और मॉनिटरिंग सेल ने लगातार केस की समीक्षा की और न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की। इस महत्वपूर्ण दोषसिद्धि में डीजीसी प्रियानन्द सिंह और एजीसी जयनाथ यादव की भूमिका अहम रही। उनकी मजबूत दलीलों और साक्ष्यों की सटीक प्रस्तुति से अभियोजन पक्ष को मजबूती मिली।
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पुलिस विभाग ने इसे “ऑपरेशन कनविक्शन”के तहत बड़ी सफलता बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सुनिश्चित सजा से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और अपराधियों के मन में कानून का भय बना रहता है। न्यायालय के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। यह निर्णय कानून व्यवस्था को मजबूत करने और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।