हिंदी
महराजगंज के फरेंदा पुलिस ने मेडिकल स्टोर में हुई चोरी की घटना का 24 घंटे के भीतर खुलासा कर एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी की गई नकदी और वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद की है।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
Phrenda: महराजगंज जनपद के थाना फरेंदा पुलिस ने कस्बा क्षेत्र में हुई चोरी की वारदात का महज 24 घंटे के भीतर सफल खुलासा कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई में पुलिस ने एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की गई नकदी और वारदात में प्रयुक्त कुल्हाड़ी बरामद की है। पुलिस की इस सफलता से जहां अपराधियों में हड़कंप मच गया है, वहीं स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास और मजबूत हुआ है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, 4 से 5 जनवरी की मध्यरात्रि कस्बा फरेंदा स्थित महिमा मेडिकल स्टोर में अज्ञात चोर ने कुल्हाड़ी से ताला तोड़कर दुकान में प्रवेश किया। चोर ने गल्ले में रखे लगभग 35 हजार रुपये नकद चोरी कर लिए। सुबह दुकान खोलने पर ताले टूटे देख चोरी की जानकारी हुई। इसके बाद दुकान स्वामी उमेशचंद्र यादव पुत्र लालबेचन, निवासी छितही, थाना फरेंदा ने थाने में लिखित तहरीर दी।
वहीं तहरीर के आधार पर थाना फरेंदा में मुकदमा संख्या 002/2026, धारा 331(4), 305(A) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक महराजगंज के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया।
जानकारी के अनुसार, लगातार प्रयासों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अभियुक्त नीरज उर्फ भुअर पुत्र शिवचरन पासवान, निवासी ग्राम निरनाम पूर्वी टोला लेदवा, थाना फरेंदा को चिन्हित किया। पुलिस ने 6 जनवरी को दोपहर 12:40 बजे अभियुक्त को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 17,100 रुपये नकद और चोरी में प्रयुक्त एक अदद कुल्हाड़ी बरामद की गई।
पुलिस पूछताछ में अभियुक्त ने चोरी की वारदात को स्वीकार कर लिया है। पुलिस द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। बरामद नकदी और हथियार को विधिवत जब्त कर लिया गया है।
आगरा की 2 बड़ी कंपनियों पर ED की रेड, सुबह से ही अंदर कैद हैं बड़े लोग, जानें ताजा अपडेट
इस सफल कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक योगेन्द्र कुमार राय, चौकी प्रभारी अजय कुमार वर्मा, उपनिरीक्षक मधुकर सिंह, कांस्टेबल आज्ञाराम यादव एवं कांस्टेबल दीपक यादव की अहम भूमिका रही।