महराजगंज में 1.5 लाख बच्चों की जांच ने खोली चौंकाने वाली तस्वीर! 805 मासूमों में मिली बीमारी, 202 बच्चों के दिल में छेद

महराजगंज में बच्चों की सेहत को लेकर हुई स्क्रीनिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। करीब 1.5 लाख बच्चों की जांच में 805 बच्चे अलग-अलग बीमारियों से प्रभावित मिले, जिनमें 202 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित हैं। 121 बच्चों में बहरापन और कई में दूसरी गंभीर समस्याएं मिली हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 3 November 2026, 9:40 PM IST
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Maharajganj: महराजगंज में बच्चों की सेहत को लेकर हुई स्क्रीनिंग में ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जिले में करीब 1.5 लाख बच्चों की जांच के दौरान 805 बच्चे अलग-अलग जन्मजात बीमारियों और विकास संबंधी समस्याओं से प्रभावित मिले। इनमें 202 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित हैं। अब प्रशासन ने इन बच्चों को समय पर इलाज दिलाने के लिए नई पहल शुरू की है। आखिर इन मासूमों की बीमारी से जुड़ी पूरी तस्वीर क्या है और इलाज के लिए प्रशासन ने क्या तैयारी की है?

1.5 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग में 805 मिले बीमार

महराजगंज जिले में बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट पहचान के तहत बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई है। अब तक करीब 1.5 लाख बच्चों की जांच हो चुकी है। इस दौरान कुल 805 बच्चे विभिन्न जन्मजात बीमारियों और विकासात्मक बाधाओं से प्रभावित पाए गए हैं।

स्क्रीनिंग के दौरान सामने आए आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें कई ऐसी समस्याएं शामिल हैं जिनकी समय रहते पहचान और उपचार से बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है। स्वास्थ्य विभाग अब इन बच्चों को चिह्नित कर इलाज की प्रक्रिया से जोड़ने में जुटा है।

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202 बच्चों को जन्मजात हृदय रोग, 121 में बहरापन

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, चिह्नित बच्चों में सबसे अधिक 202 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित मिले हैं। इसके अलावा 121 बच्चों में जन्मजात बहरेपन की समस्या सामने आई है। वहीं, 86 बच्चों में डीडीएच यानी कूल्हे के जोड़ से जुड़ी समस्या पाई गई है। जबकि 76 बच्चे कटे होंठ और तालू की समस्या से प्रभावित मिले हैं।

इसके अलावा डाउन सिंड्रोम, भाषा विकास में देरी, माइक्रोसेफली और दूसरी विकासात्मक समस्याओं से प्रभावित बच्चों को भी चिह्नित किया गया है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अब प्रशासन का जोर सिर्फ बच्चों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सही समय पर इलाज उपलब्ध कराने पर है।

सीडीओ ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले को लेकर मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक और कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्क्रीनिंग की प्रगति, बीमारियों की पहचान और उपचार की व्यवस्था की जानकारी दी। बैठक में सीडीओ ने साफ निर्देश दिए कि स्क्रीनिंग का काम जल्द पूरा किया जाए और जिन बच्चों में बीमारी की पुष्टि हुई है, उनके इलाज में देरी न हो।

उन्होंने चिकित्सा अधीक्षकों और प्रभारी अधीक्षकों को नियमित समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहा कि हर चिह्नित बच्चे को उसकी जरूरत के हिसाब से स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए। सिर्फ बीमारी का पता लगा लेना काफी नहीं है, बल्कि बच्चे को उचित उपचार दिलाना भी जरूरी है।

अब पोर्टल और ऐप से रखी जाएगी हर बच्चे पर नजर

प्रोजेक्ट पहचान को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने पोर्टल और मोबाइल ऐप का ट्रायल भी शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर उनके इलाज तक की पूरी जानकारी एक जगह उपलब्ध कराना है। जिला सूचना विज्ञान अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक, पोर्टल पर चार स्तरों पर डाटा फीडिंग की व्यवस्था की गई है। इसमें ग्राम पंचायत, सीएचओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल शामिल हैं।

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इस व्यवस्था से हर स्तर पर बच्चों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा सकेगी। साथ ही अधिकारी यह भी देख सकेंगे कि किस बच्चे की स्क्रीनिंग हुई, किसे इलाज की जरूरत है और उपचार की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।

हर बच्चे की बनेगी अलग प्रोफाइल

बैठक के अंत में सीडीओ महेंद्र कुमार सिंह ने सभी चिह्नित बच्चों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें बच्चे की बीमारी, स्वास्थ्य की स्थिति और जरूरी उपचार से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके आधार पर तय किया जाएगा कि बच्चे का इलाज किस अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर कराया जाना है और उसे किस तरह की चिकित्सा सुविधा की जरूरत है।

सीडीओ ने चिकित्सकों, सीएचओ, आशा और एएनएम से पोर्टल एवं ऐप के ट्रायल के दौरान अपनी प्रतिक्रिया देने को भी कहा, ताकि सामने आने वाली कमियों को दूर किया जा सके। अब सबसे अहम चुनौती इन 805 बच्चों तक समय पर इलाज पहुंचाने की है।

Location :  Maharajganj

Published :  3 November 2026, 9:40 PM IST

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