बेंगलुरु में कन्नड़ समर्थक समूहों पर भड़के उद्योगपति, D.K. शिवकुमार सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग

बेंगलुरु की आईटी कंपनियों में भर्ती को लेकर विवाद बढ़ गया है। कन्नड़ समर्थक समूहों के दफ्तरों में पहुंचने और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाने से उद्योग जगत के बड़े नाम नाराज हैं। टाइगर रमेश और इंफोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पई ने डीके शिवकुमार सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 3 November 2026, 9:13 PM IST
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Bengaluru:बेंगलुरु को देश की आईटी राजधानी कहा जाता है, लेकिन यहां की टेक कंपनियों में इन दिनों भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। कुछ कन्नड़ समर्थक समूहों की ओर से कंपनियों के दफ्तरों में पहुंचकर भर्ती से जुड़ी जानकारी मांगने के मामले ने उद्योग जगत में नाराजगी पैदा कर दी है। अब कई बड़े उद्योगपतियों ने कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार से ऐसे समूहों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि निजी कंपनियों में डराने-धमकाने की जगह योग्यता के आधार पर काम होना चाहिए।

टेक कंपनियों के दफ्तरों में पहुंच रहे कन्नड़ समर्थक समूह

यह विवाद तब बढ़ा जब कन्नड़ भाषा के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन 'कर्नाटक रक्षण वेदिके' (KRV) के सदस्यों ने एक टेक कंपनी के कार्यालय में पहुंचकर उसकी भर्ती प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। समूह का आरोप है कि बेंगलुरु की बड़ी आईटी कंपनियों में कन्नड़ बोलने वाले उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि स्थानीय युवाओं को नौकरी के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।

हालांकि, कंपनियों के दफ्तरों में इस तरह पहुंचकर सवाल पूछने और दबाव बनाने की घटनाओं पर उद्योग जगत के लोगों ने आपत्ति जताई है।

टाइगर रमेश ने सरकार से पूछे सवाल

सीरियल एंटरप्रेन्योर रमेश गोविंदन, जिन्हें टाइगर रमेश के नाम से भी जाना जाता है, ने मंगलवार को इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कर्नाटक सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी घटनाओं को होने क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में केवल कर्नाटक ही नहीं, बल्कि पूरे देश में योग्यता के आधार पर काम होता है। सरकार को कंपनियों को सीधे धमकाने वाली ऐसी गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए।

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रमेश ने अपने पुराने अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि साल 1999 में जब आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें अपना टेक बिजनेस हैदराबाद ले जाने का न्योता दिया था, तब कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा ने मुख्य सचिव को भेजकर उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए मनाया था।

इंफोसिस के पूर्व CFO मोहनदास पई भी हुए नाराज

इस विवाद पर इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) मोहनदास पई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोमवार को एक्स पर लिखा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के रहते राज्य में इस तरह के मनमाने समूहों की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं को तुरंत रोकने की मांग की। पई की इस प्रतिक्रिया के बाद टेक उद्योग में कंपनियों की सुरक्षा और कामकाज के माहौल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

पहले भी स्थानीय लोगों की भर्ती पर उठा था सवाल

बेंगलुरु में कन्नड़ भाषा और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर विवाद नया नहीं है। भाषा समर्थक संगठन कई बार उन मामलों में दखल देते रहे हैं, जहां उन्हें लगता है कि कन्नड़ भाषा या स्थानीय लोगों की अनदेखी हो रही है।  ये संगठन कावेरी जल विवाद और कन्नड़ भाषियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। हालांकि, स्थानीय हितों की रक्षा के नाम पर उनकी कुछ गतिविधियों को लेकर विवाद भी होता रहा है।

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शिवकुमार ने भी आईटी कंपनियों को दी थी चेतावनी

गौरतलब है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी आईटी कंपनियों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर कंपनियां भेदभाव करती हैं या स्थानीय लोगों को नौकरी के अवसरों से दूर रखती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक महिला के वीडियो के बाद आई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि आईटी कंपनियों में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है। उसने यह भी दावा किया था कि रिज्यूमे में कन्नड़ भाषा का जिक्र होने पर कंपनियां उम्मीदवारों को स्वीकार करने से बचती हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

अब इस पूरे विवाद ने कर्नाटक सरकार के सामने दो अहम मुद्दे खड़े कर दिए हैं। एक तरफ स्थानीय कन्नड़ युवाओं को नौकरी में उचित अवसर देने की मांग है, तो दूसरी तरफ टेक कंपनियों के कामकाज में बाहरी समूहों के हस्तक्षेप को रोकने की मांग उठ रही है। उद्योग जगत के दिग्गज चाहते हैं कि कंपनियों को बिना किसी दबाव के काम करने दिया जाए। वहीं, कन्नड़ समर्थक समूह स्थानीय लोगों के अधिकारों की बात उठा रहे हैं।

Location :  Bengaluru

Published :  3 November 2026, 9:13 PM IST

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