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मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Image: X)
कर्नाटक एमएलसी चुनाव के नतीजे सामने आते ही भाजपा ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘डीके, इट्स डन ब्रो। एमएलसी चुनावों में एनडीए ने शिक्षकों और स्नातकों के सभी चार निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की है।’
भाजपा का यह तंज सोशल मीडिया पर चर्चित ‘इट्स डन ब्रो’ वाले अंदाज से जुड़ा है। पार्टी ने इस वाक्य का इस्तेमाल कांग्रेस की हार पर कटाक्ष करने के लिए किया। चारों सीटों पर जीत को भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत स्थिति के संकेत के रूप में पेश किया है।
कर्नाटक विधान परिषद की इन चार सीटों के लिए चुनाव राज्य के 19 जिलों में हुए। इन जिलों में राज्य का करीब दो-तिहाई हिस्सा शामिल है। चुनावी क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह जिले भी आते हैं।
दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में एनडीए की जीत ने गठबंधन को कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमला तेज करने का मौका दिया है। भाजपा और जेडीएस का दावा है कि पढ़े-लिखे मतदाताओं, शिक्षकों और स्नातकों ने उनके गठबंधन पर भरोसा जताया है। हालांकि, इन नतीजों को पूरे राज्य के मतदाताओं की राय का सीधा संकेत मानने से पहले चुनाव के सीमित दायरे को ध्यान में रखना जरूरी है।
चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी मतदाताओं के फैसले का सम्मान करती है। उन्होंने माना कि नतीजे कांग्रेस की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। पार्टी को एक या दो सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस चुनावी नतीजों की गहराई से समीक्षा करेगी। पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि कहां कमियां रह गईं और मतदाताओं ने किस तरह का संदेश दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन और चुनावी रणनीति में जरूरी सुधार किए जाएंगे।
कांग्रेस के लिए यह नतीजा इसलिए भी अहम है, क्योंकि राज्य में पार्टी की सरकार है और डीके शिवकुमार संगठन के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में परिषद चुनावों की हार विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे सकती है।
एनडीए नेताओं ने चारों सीटों पर जीत को बड़ी राजनीतिक उपलब्धि बताया है। जेडीएस के प्रदेश युवा अध्यक्ष निखिल कुमार ने इसे दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में ऐतिहासिक 4/4 क्लीन स्वीप करार दिया।
निखिल कुमार ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी तंत्र और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए। उन्होंने चुनाव परिणामों को बैलेट पेपर के जरिए सामने आया जनादेश बताते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत को दिखाता है। साथ ही, उन्होंने इस जीत को 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों का ‘ट्रेलर’ बताया।
एनडीए इस नतीजे को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने के अवसर के रूप में देख रहा है। वहीं, कांग्रेस के सामने अब हार के कारणों की समीक्षा कर संगठन और मतदाता संपर्क को मजबूत करने की चुनौती होगी।
फिलहाल, विधान परिषद की चार सीटों पर एनडीए की जीत ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा के ‘डीके, इट्स डन ब्रो’ वाले तंज और शिवकुमार के समीक्षा के भरोसे के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह नतीजा आने वाले महीनों में राज्य की सियासत को किस दिशा में ले जाता है।
Location : Karnataka
Published : 28 October 2026, 3:50 PM IST