Morning Tiredness: 7-8 घंटे सोने के बाद भी सुबह रहती है थकान, तो ये हो सकती हैं वजह

Morning Fatigue: 7-8 घंटे सोने के बाद भी सुबह थकान और आलस महसूस होता है? जानें खराब नींद, पानी की कमी, पोषण, तनाव और संभावित बीमारियों से जुड़े कारण और बचाव के उपाय।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 28 October 2026, 3:29 PM IST
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New Delhi: सुबह नींद से जागने के बाद भी अगर बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता और दिन की शुरुआत सुस्ती से होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई लोगों को सात से आठ घंटे सोने के बाद भी सिर भारी रहने, बार-बार जम्हाई आने और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं महसूस होती हैं।

इसकी वजह हमेशा नींद की कमी नहीं होती। खराब नींद, तनाव, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इसके पीछे हो सकती है। यदि थकान लगातार बनी रहे, तो इसके कारणों को समझना जरूरी है।

नींद की गुणवत्ता पर भी दें ध्यान

केवल आठ घंटे सोना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नींद का अच्छी गुणवत्ता वाला होना भी जरूरी है। सोने-जागने का समय रोज बदलना, रात में बार-बार नींद टूटना, शोरगुल, असुविधाजनक बिस्तर और सोने से पहले मोबाइल चलाना आरामदायक नींद में बाधा डाल सकते हैं।

शाम या रात में कैफीन का सेवन भी कुछ लोगों की नींद प्रभावित कर सकता है। बेहतर नींद के लिए नियमित समय पर सोएं, कमरे का वातावरण शांत रखें और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।

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शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है वजह

शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, कमजोरी और सिरदर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। रात में पसीना आने, गर्मी या बीमारी के कारण शरीर से तरल पदार्थ कम हो सकते हैं। इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।

हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है और यह मौसम, गतिविधि तथा स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि पेशाब का रंग लगातार गहरा हो या चक्कर और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें।

शरीर में पानी की कमी (Img- Pinterest)

पोषण की कमी से घट सकती है ऊर्जा

असंतुलित खानपान और जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी लगातार थकान का कारण बन सकती है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जबकि विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी भी कुछ लोगों में कमजोरी या थकान से जुड़ी हो सकती है।

इसके लिए दालें, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन के उचित स्रोतों को आहार में शामिल करें। बिना जांच के विटामिन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से जांच कराएं।

व्यायाम की कमी और तनाव को न करें नजरअंदाज

लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि से बचना दिनचर्या तथा नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। नियमित टहलना, योग और अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है। वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि सामान्य स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन का हिस्सा है।

इसके अलावा तनाव भी नींद और ऊर्जा पर असर डाल सकता है। संगीत सुनना, पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और ध्यान का अभ्यास तनाव संभालने में मदद कर सकता है।

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लगातार थकान किसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है

यदि पर्याप्त आराम और दिनचर्या में सुधार के बावजूद थकान बनी रहती है, तो इसके पीछे एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, मधुमेह, नींद से जुड़ी बीमारी या गुर्दों की समस्या जैसे कारण हो सकते हैं। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के दौरान भी नींद और ऊर्जा में बदलाव महसूस हो सकते हैं।

एम्स, नई दिल्ली की जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. हर्षल साल्वे के हवाले से दी गई जानकारी में भी थकान को शरीर का महत्वपूर्ण संकेत मानने पर जोर दिया गया है। लगातार कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। थकान को केवल आलस मानकर छोड़ देना सही नहीं है।

Location :  New Delhi

Published :  28 October 2026, 3:29 PM IST

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