गन्ना किसानों के भुगतान और चीनी की कीमत पर घमासान, कर्नाटक के CM ने की केंद्र से दखल की अपील

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेलगावी में गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों की समस्याओं पर बैठक की। किसानों की ओर से 6,000 रुपये प्रति टन तक कीमत की मांग, भुगतान विवाद और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य का मुद्दा उठा।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 26 October 2026, 5:10 PM IST
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Belagavi: कर्नाटक में गन्ना किसानों की मांगों और चीनी मिलों की आर्थिक चुनौतियों को लेकर सोमवार, 26 अक्टूबर को अहम बैठक हुई। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौध में चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों और विधायकों के साथ चर्चा की। उन्होंने सभी पक्षों से आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि किसी एक पक्ष पर आरोप लगाने से समस्या हल नहीं होगी।

बैठक में गन्ने की कीमत, किसानों के भुगतान, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। किसानों की ओर से गन्ने के लिए 6,000 रुपये प्रति टन तक कीमत दिए जाने की मांग का भी उल्लेख किया गया।

किसानों के भुगतान और गन्ने की कीमत पर चर्चा

डीके शिवकुमार ने कहा कि पिछली सिद्धारमैया सरकार के दौरान गन्ने का राज्य सलाहकार मूल्य (एसएपी) बढ़ाकर 3,300 रुपये किए जाने के बाद भी भुगतान को लेकर विवाद सामने आए थे। उनके मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत चीनी मिलों ने भुगतान कर दिया था, जबकि कुछ मिलों ने भुगतान नहीं किया और कुछ मामलों में अदालत का रुख किया गया।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी किसानों और चीनी मिल मालिकों, दोनों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने मिल मालिकों से किसानों का भरोसा जीतने और भुगतान संबंधी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की।

गन्ना किसानों को ₹6,000 प्रति टन चाहिए दाम (Img: AI Generated)

चीनी की कीमत और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल

बैठक में चीनी की कीमतों और केंद्र सरकार की नीतियों का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री के अनुसार, किसानों का तर्क है कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य लंबे समय से नहीं बढ़ने के कारण गन्ने की बेहतर कीमत देने में कठिनाई आ रही है।

उन्होंने कहा कि चीनी उद्योग को वित्तीय व्यवस्था, बैंकिंग, इथेनॉल, शीरा और बिजली की कीमतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किसी एक पक्ष के हित में एकतरफा फैसला लेने के बजाय सभी हितधारकों से चर्चा जरूरी है। शिवकुमार ने यह भी कहा कि गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन में कमी ने स्थिति को और जटिल बनाया है। उन्होंने केंद्र सरकार के सामने इन समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखने की जरूरत पर जोर दिया।

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किसानों और मिल मालिकों के हितों में संतुलन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर चीनी मिलें बंद होती हैं, तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, गन्ना किसानों के बिना चीनी उद्योग भी नहीं चल सकता। इसलिए दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। साथ ही, केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास करने की अपील की गई है।

शिवकुमार ने पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान वाहनों में आगजनी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने देनी चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से अपनी चिंताएं और सुझाव सामने रखने की अपील की, ताकि किसानों के भुगतान और चीनी उद्योग की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके।

Location :  Belagavi

Published :  26 October 2026, 5:10 PM IST

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