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दलित मंत्रियों को रोके जाने के बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए (Img: AI Generated)
Mysore: कर्नाटक के मैसूर दशहरा समारोह में एक घटना ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। मैसूर पैलेस में नंदिध्वज पूजा के लिए जा रहे तीन मंत्रियों को पुलिसकर्मियों ने रोक दिया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से जिम्मेदार लोगों की पहचान कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
वहीं, विपक्षी भाजपा और जेडी(एस) ने आरोप लगाया है कि मंत्रियों के साथ ऐसा व्यवहार उनकी दलित पहचान के कारण किया गया। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इसे सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ा मामला बताते हुए विवाद को ज्यादा तूल न देने की अपील की है।
यह घटना मंगलवार को मैसूर पैलेस में आयोजित नंदिध्वज पूजा के दौरान हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंत्री पी.एम. नरेंद्रस्वामी, के.एस. बसवंताप्पा और शिवराज तंगदागी मुख्यमंत्री के पीछे-पीछे पूजा स्थल की ओर जा रहे थे। तभी एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
घटना के वीडियो में भी यह दृश्य दिखाई देने की बात कही गई है। बताया गया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हस्तक्षेप के बाद ही तीनों मंत्रियों को आगे जाने दिया गया।
गुरुवार, 22 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश से यह पता लगाने को कहा कि मंत्रियों को किस आधार पर रोका गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। शिवकुमार ने अधिकारियों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मंत्रियों को रोकना मनमानी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ हो सकती है।
घटना के बाद भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। विपक्षी दलों का आरोप है कि तीनों मंत्रियों को दलित समुदाय से होने के कारण रोका गया। भाजपा ने इस मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया।
वहीं, मुजराई मंत्री के.एस. बसवंताप्पा ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी प्रोटोकॉल की जानकारी नहीं थी, जिसके तहत उनकी आवाजाही रोकी जा सकती थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके मुताबिक, अधिकारियों को पता था कि वे मंत्री हैं, फिर भी उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने मामले को ज्यादा तूल न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान पुलिस सुरक्षा और प्रोटोकॉल की व्यवस्था संभाल रही थी। शुरुआत में मंत्रियों को रोका गया, लेकिन मुख्यमंत्री वापस आए और उन्हें अपने साथ ले गए। परमेश्वर ने यह सवाल भी उठाया कि मंत्रियों की पहचान बार-बार उनकी जाति के आधार पर क्यों बताई जा रही है। उन्होंने माना कि अधिकारियों से गलती हो सकती है, लेकिन हर चूक को बड़ा विवाद बनाना उचित नहीं है।
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को नई दिल्ली भी पहुंचे। उनके कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों के साथ कर्नाटक से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा शामिल है। इनमें पश्चिमी घाट से संबंधित कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित जमीन का मामला भी शामिल है।
शिवकुमार ने कहा कि वन और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए उन्होंने संबंधित केंद्रीय मंत्री से मिलने का अनुरोध किया था।
Location : Mysore
Published : 22 October 2026, 5:41 PM IST