जनता के पैसों की बर्बादी या अफसरों की मिलीभगत? झांसी में 60 करोड़ के विकास कार्यों पर उठे गंभीर सवाल

झांसी में 60 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही CM ग्रिड परियोजना के बावजूद फुटपाथ के टाइल्स टूटने और नालियों की गुणवत्ता पर सवाल क्यों उठ रहे हैं? क्या तकनीकी जांच से निर्माण कार्यों की खामियां सामने आएंगी?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 22 October 2026, 5:53 PM IST
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Jhansi: शहर को स्मार्ट और सुविधाजनक बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल विकास के दावों को चुनौती दे रहे हैं। CM ग्रिड परियोजना के तहत सड़कों, फुटपाथों, नालियों और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना बनाई गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर फुटपाथ के टाइल्स टूटने, नालियों की ढलान में गड़बड़ी और अतिक्रमण की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 60 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही परियोजना का लाभ आखिर शहरवासियों को कितना मिल रहा है?

करोड़ों की परियोजना

झांसी में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 950 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात कही जाती रही है। अब शहर की सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए CM ग्रिड परियोजना से उम्मीदें जुड़ी हैं। इसके तहत चार सड़कों को चिह्नित कर फुटपाथ, नालियों, सीवरेज व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट के खंभों सहित कई कार्यों की योजना बनाई गई। हालांकि, स्थानीय स्तर पर सामने आ रही तस्वीर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर रही है। कुछ स्थानों पर फुटपाथ के टाइल्स टूटे हुए दिखाई देने की शिकायत है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि निर्माण के दौरान किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया और काम पूरा होने के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई।

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फुटपाथ के टूटते टाइल्स

फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वालों को सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि निर्माण के कुछ समय बाद ही टाइल्स टूटने लगें, तो काम की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों के मुताबिक, कुछ जगहों पर फुटपाथ की हालत खराब है और टाइल्स क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है कि निर्माण कार्य के दौरान सामग्री की गुणवत्ता की जांच किसने की? क्या निर्धारित मानकों के अनुसार काम कराया गया था? यदि तकनीकी जांच में खामियां सामने आती हैं, तो उनकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था से मिलना जरूरी है।

नालियों की ढलान पर भी उठ रहे सवाल

CM ग्रिड परियोजना के तहत नालियों और जल निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने का भी लक्ष्य है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों पर नालियों की ऊंचाई और ढलान को लेकर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। जल निकासी की उचित व्यवस्था के लिए नाली की सही ढलान बेहद जरूरी होती है। यदि निर्माण में तकनीकी खामी रह जाती है, तो पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है और बारिश के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नालियों की तकनीकी जांच कराना और जरूरत के मुताबिक सुधार करना जरूरी है।

फुटपाथ पर अतिक्रमण से पैदल चलने वालों को परेशानी

शहर में फुटपाथों की स्थिति को लेकर एक और समस्या सामने आती है। कुछ स्थानों पर दुकानदारों के सामान, हाथ ठेलों और वाहनों की मरम्मत करने वाली दुकानों के कारण पैदल चलने वालों के लिए जगह कम पड़ने की शिकायत है। मरम्मत के काम से निकलने वाली गंदगी और अन्य सामग्री भी फुटपाथ की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

यदि फुटपाथ का निर्माण पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए किया गया है, तो उस पर अतिक्रमण रोकना भी जरूरी है। इसके लिए केवल निर्माण कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था भी होनी चाहिए। संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहें।

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60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत

CM ग्रिड परियोजना की बताई जा रही 60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवालों को और महत्वपूर्ण बना दिया है। आखिर इस राशि से कौन-कौन से काम कराए गए? निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की जांच किसने की? काम पूरा होने के बाद गुणवत्ता का आकलन किस आधार पर किया गया? इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। हालांकि, केवल टाइल्स टूटने या नालियों की स्थिति खराब होने की शिकायतों के आधार पर भ्रष्टाचार या सरकारी धन के दुरुपयोग का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए परियोजना के दस्तावेजों, भुगतान विवरण, तकनीकी मानकों और निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं?

झांसी को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जा रही सार्वजनिक धनराशि का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। यदि निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ है या तकनीकी खामियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। फिलहाल, इन शिकायतों पर संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है। शहरवासियों को उम्मीद है कि शिकायतों की जांच होगी, खामियां मिलने पर उन्हें दूर किया जाएगा और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

Location :  Jhansi

Published :  22 October 2026, 5:53 PM IST

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