कर्नाटक में वाल्मीकि सियासत का बवंडर: ED और SIT के फेर में फंसी सिद्धारमैया सरकार, नागेंद्र के इस्तीफे पर आर-पार

कर्नाटक में वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मंत्री बी. नागेंद्र के दोबारा कैबिनेट में शामिल होने पर विपक्ष हमलावर है। जानिए आरोप, दलित कार्ड और बीजेपी की 170 किमी लंबी पदयात्रा का पूरा सच।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 26 August 2026, 12:18 PM IST
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Bengaluru: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाला केंद्र में आ गया है। करीब 187 करोड़ रुपये के कथित हेरफेर का यह मामला न सिर्फ कानूनी दांव-पेच में उलझा है, बल्कि इसने राज्य की पूरी सियासत को गर्मा दिया है।

हाल ही में कैबिनेट में वापस लौटे मंत्री बी. नागेंद्र की बर्खास्तगी को लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।

विपक्ष का 'मिशन 187 करोड़' और पदयात्रा का प्लान

भारतीय जनता पार्टी और जेडीएस इस मुद्दे पर किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं हैं। विधानसभा में जोरदार हंगामे से लेकर सड़कों पर प्रदर्शन तक, विपक्ष सरकार को पूरी तरह घेर चुका है।

बी.वाई. विजयेंद्र और आर. अशोक के नेतृत्व में 'विधान सौध चलो' मार्च के बाद अब बीजेपी ने 1 सितंबर से रायचूर से बेल्लारी तक 170 किलोमीटर लंबी 10 दिवसीय पदयात्रा का ऐलान किया है, ताकि इस मुद्दे को सीधे जनता की अदालत तक ले जाया जा सके।

नागेंद्र का 'दलित कार्ड' और कानूनी ढाल

दूसरी तरफ, अपनी वापसी पर सवाल उठने के बाद बी. नागेंद्र ने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच एजेंसियों के सामने निर्दोष साबित हो चुके हैं और मामला कोर्ट में है।

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नागेंद्र का कहना है कि वे दलित समुदाय से आते हैं, इसलिए विपक्ष उन्हें और कांग्रेस सरकार को जानबूझकर निशाना बना रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार भी इस पूरी लड़ाई में मंत्री के बचाव में डटे हुए हैं और इसे बीजेपी का 'राजनीतिक ड्रामा' बता रहे हैं।

Location :  Bengaluru

Published :  26 August 2026, 12:18 PM IST

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