बगावत का ऐसा बवंडर! TMC और शिवसेना के 26 बागी सांसदों की सांसें अटकीं, स्पीकर के एक नोटिस से हिल गई सियासत

TMC और शिवसेना (UBT) के 26 बागी सांसदों पर अयोग्यता का खतरा मंडरा रहा है। लोकसभा सचिवालय ने नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है, जिससे देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

Updated : 26 August 2026, 10:13 AM IST
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New Delhi: भारतीय राजनीति के गलियारों में दलबदल और बगावत का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों को एक के बाद एक बड़े झटके मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के भीतर मची भगदड़ ने सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। संसद से लेकर अदालत तक इन बागी सांसदों की वैधता और भविष्य को लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान छिड़ गया है।

TMC में दो-तिहाई बहुमत का दावा बनाम कानूनी दांवपेंच

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल लाते हुए TMC के 20 बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे हाई-प्रोफाइल चेहरों की अगुवाई में इस धड़े ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को सीधी चुनौती दी है।

बागी गुट का दावा है कि उनके पास कुल 28 में से 20 सांसदों का समर्थन है, जो कि दो-तिहाई (2/3) बहुमत से अधिक है। उनका तर्क है कि यह दलबदल कानून के दायरे में एक वैध 'विलय' है, क्योंकि उन्होंने 'नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का दामन थाम लिया है। इसके उलट, TMC नेतृत्व का सख्त रुख है कि केवल विधायी दल के टूटने से मूल राजनीतिक दल का विलय नहीं माना जा सकता।

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लोकसभा सचिवालय का अल्टीमेटम और सुप्रीम कोर्ट की एंट्री

मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने कड़ा कदम उठाया है। तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी 20 बागी सांसदों को नोटिस थमा दिया है। इन सांसदों को अपने ऊपर मंडरा रहे सदस्यता रद्द होने के खतरे के बीच 7 दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण देना होगा।

विवाद उस वक्त और गहरा गया जब इस प्रक्रिया में देरी के खिलाफ अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च अदालत ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए बागी सांसदों को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को स्पष्ट किया कि लोकसभा स्पीकर पहले ही नियमों के तहत कार्रवाई शुरू कर चुके हैं।

शिवसेना (UBT) को महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में भी बड़ा झटका

सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को बड़ा सियासी आघात लगा है। लोकसभा में पार्टी के कुल 9 में से 6 सांसदों- संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकार, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल ने बगावत कर दी है।

इन बागी सांसदों ने 'मातोश्री' की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी अपनी मूल हिंदुत्ववादी विचारधारा से भटककर कांग्रेस की राह पर चल पड़ी है। इन सभी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े में आधिकारिक तौर पर विलय करने और संसद के भीतर अपनी अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।

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आने वाले दिनों में क्या होगा सियासी रुख?

यह राजनीतिक संकट सिर्फ सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के 'दल-बदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) की व्याख्या और उसकी प्रभावशीलता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है। TMC में 64 विधायकों के साथ विधानसभा में बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को 'नेता विपक्ष' का दर्जा मिलने से ममता सरकार की मुश्किलें पहले ही बढ़ चुकी हैं।

अब सारा दारोमदार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाइयों पर टिका है। यदि 7 दिनों के भीतर बागी सांसद संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो संसद से इनकी सदस्यता का जाना तय माना जा रहा है, जो भारतीय राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  26 August 2026, 10:13 AM IST

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