आंदोलन खत्म हुआ था या सिर्फ टला था? सरकार के वादों का होगा हिसाब, सोमवार को CJP लेगी बड़ा फैसला

कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में केंद्र सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों की समीक्षा करेगी। पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के बाद सरकार ने वादों पर आगे की कार्रवाई को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है। बैठक में जरूरत पड़ने पर दोबारा शांतिपूर्ण देशव्यापी आंदोलन शुरू करने पर फैसला हो सकता है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 23 August 2026, 6:01 PM IST
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New Delhi: 25 जुलाई को आंदोलन खत्म हुआ, सरकार की ओर से भरोसा मिला और लगा कि छात्रों से जुड़े मामलों का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन अब करीब एक महीने बाद वही भरोसा सवालों के घेरे में है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का आरोप है कि आंदोलन वापस लेने के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों से किए गए आश्वासनों पर अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। ऐसे में सोमवार को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

25 जुलाई को सरकार के भरोसे पर खत्म हुआ था आंदोलन

CJP ने 25 जुलाई को अपना देशव्यापी आंदोलन वापस लिया था। पार्टी का कहना है कि आंदोलन खत्म करने का फैसला केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों और भरोसे के आधार पर लिया गया था। उस समय छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को लेकर कई मांगें सामने रखी गई थीं।

FIR और मुकदमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल

CJP के सामने सबसे बड़ा मुद्दा आंदोलन से जुड़े छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों का है। पार्टी का कहना है कि आंदोलन वापस लेते समय सरकार ने मामलों को वापस लेने या रद्द कराने की दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिया था। लेकिन अब तक उसे यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कितने मामलों की समीक्षा हुई और कितनी FIR पर कार्रवाई की गई। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है।

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद और बढ़ी हलचल

CJP का यह रुख सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद और ज्यादा चर्चा में आया है। पार्टी के अनुसार, शीर्ष अदालत ने देशभर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की संयुक्त सूची मांगी थी। CJP का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार से यह सूची उपलब्ध कराने को कहा गया था। अदालत इस बात पर भी विचार कर रही थी कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को खत्म किया जा सकता है।

मुआवजे के मुद्दे पर भी सरकार से जवाब की मांग

आंदोलन के दौरान NEET-UG से जुड़े छात्रों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया था। परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा रही थी। CJP का कहना है कि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर भी आश्वासन दिया गया था। अब पार्टी जानना चाहती है कि इस दिशा में क्या कार्रवाई हुई है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलेगी।

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सरकार से औपचारिक बातचीत नहीं होने का आरोप

CJP का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लिए जाने के बाद सरकार की ओर से उसके प्रतिनिधियों से औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया गया। पार्टी का कहना है कि उसे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को लेकर क्या प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास और कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद सरकार के रवैये को लेकर चिंता जताई थी।

सोमवार की बैठक पर टिकी सबकी नजर

अब सोमवार को होने वाली CJP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। बैठक में सरकार के आश्वासनों की एक-एक करके समीक्षा की जाएगी। पार्टी यह देखेगी कि FIR वापस लेने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रगति हुई है।

Location :  New Delhi

Published :  23 August 2026, 6:01 PM IST

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