‘खंडहर से ‘स्मार्ट’ क्लासरूम का सफर!’ DM की अनोखी सोच से संवरेंगे 147 स्कूल, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

सुलतानपुर में 147 जर्जर सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प होगा। असुरक्षित भवनों का ध्वस्तीकरण पूरा हो चुका है और नए भवनों के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बाउंड्रीवॉल, इंटरलॉकिंग और खड़ंजे का भी निर्माण कराया जाएगा।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 23 August 2026, 5:59 PM IST
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Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के सरकारी विद्यालयों की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने बड़ी पहल की है। जिले के 14 विकासखंडों में स्थित 147 जर्जर प्राइमरी एवं कंपोजिट विद्यालयों को चिन्हित कर उनके भवनों की तकनीकी जांच कराई गई। जांच में असुरक्षित पाए गए भवनों का नियमानुसार ध्वस्तीकरण पूरा कराया जा चुका है। अब इन विद्यालयों में नए भवनों के निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है।

तकनीकी जांच के बाद जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण

जर्जर विद्यालय भवनों की तकनीकी जांच लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एवं आरईएस विभाग के अभियंताओं के माध्यम से कराई गई। परीक्षण के दौरान जिन भवनों को विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित पाया गया, उन्हें ध्वस्त करा दिया गया। इसके बाद नए भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता द्वारा जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के अनुमोदन से शासन को भेज दिया गया है।

बजट मिलते ही शुरू होगा नए भवनों का निर्माण

शासन से बजट स्वीकृत होते ही चिन्हित विद्यालयों में नए भवनों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। इससे लंबे समय से जर्जर भवनों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सकेगा। प्रशासन का जोर विद्यालयों को केवल भवन के रूप में विकसित करने के बजाय उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर शिक्षण केंद्र बनाने पर है।

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बाउंड्रीवॉल से लेकर रास्तों तक होगा विद्यालयों का कायाकल्प

डीएम इंद्रजीत सिंह ने विद्यालयों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में बाउंड्रीवॉल निर्माण, परिसर का विकास तथा विद्यालयों तक आने-जाने वाले रास्तों पर इंटरलॉकिंग और खड़ंजे का निर्माण कराने की दिशा में कार्य शुरू कराया जा रहा है।

इसको लेकर जिलाधिकारी ने जनपद के सभी खंड विकास अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को विद्यालयों की मूलभूत जरूरतों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य कराने को कहा गया है।

सुरक्षित भवन के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी जोर

जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने कहा कि विद्यालयों के कायाकल्प का उद्देश्य केवल जर्जर भवनों को हटाकर नए भवन बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर शैक्षिक वातावरण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी है।

उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता को निर्देशित किया है कि सभी विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण कराया जाए। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारियों और एआरपी को भी विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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बारिश में बच्चों को रास्ते की समस्या से मिलेगी राहत

विद्यालयों में बाउंड्रीवॉल बनने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। वहीं इंटरलॉकिंग और खड़ंजे के निर्माण से बारिश के मौसम में कीचड़ और जलभराव के कारण बच्चों एवं शिक्षकों को विद्यालय तक पहुंचने में होने वाली परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।

निरीक्षण के साथ क्वालिटी एजुकेशन की होगी निगरानी

डीएम इंद्रजीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों के भौतिक कायाकल्प के साथ-साथ क्वालिटी एजुकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था, बच्चों की उपस्थिति, मूलभूत सुविधाओं और शैक्षिक गुणवत्ता की नियमित समीक्षा एवं निरीक्षण पर जोर दिया जा रहा है।

जिले में एक साथ 147 जर्जर विद्यालयों के पुनर्निर्माण की पहल को सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने पर इन विद्यालयों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। इससे अभिभावकों, शिक्षकों और ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी है कि सुलतानपुर के सरकारी विद्यालय आने वाले समय में सुरक्षित, सुंदर और बेहतर सुविधाओं से लैस नजर आएंगे।

Location :  Sultanpur

Published :  23 August 2026, 5:59 PM IST

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