‘सामने होतीं तो गले लगा लेती…’ शर्मिला टैगोर के बयान पर कंगना रनौत का हैरान करने वाला जवाब

शर्मिला टैगोर के ‘वंदे मातरम’ को लेकर दिए बयान पर कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने कहा कि कविता और कला में शब्द रूपक होते हैं और ‘वंदे मातरम’ को केवल धार्मिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 21 August 2026, 2:48 PM IST
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New Delhi: अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। अब उन्होंने दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के ‘वंदे मातरम’ को लेकर दिए बयान पर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने शर्मिला टैगोर की बात का सम्मान करते हुए कहा कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें उनकी कला और कविता को लेकर सोच कुछ सीमित और बनावटी लगी।

शर्मिला टैगोर ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर क्या कहा?

आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में शर्मिला टैगोर ने कहा था कि कई धार्मिक लोग एक ईश्वर में विश्वास करते हैं। उनके मुताबिक, ‘वंदे मातरम’ के एक पद में कई देवताओं का उल्लेख आता है, इसलिए एकेश्वरवाद में विश्वास रखने वाले कुछ लोगों के लिए उसमें मौजूद कुछ पंक्तियों को कहना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा था कि अगर भारत के सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलना है, तो शुरुआती दो पद सभी के लिए अधिक स्वीकार्य हो सकते हैं।

कंगना ने इंस्टा स्टोरी पर साझा किया स्क्रीनशॉट

शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का स्क्रीनशॉट कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। उन्होंने लिखा कि वह शर्मिला जी की इस बात की सराहना करती हैं कि उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को लेकर अपनी आपत्ति खुलकर सामने रखी।

हालांकि, कंगना ने इसके साथ यह भी कहा कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें आश्चर्य है कि कला या कविता को लेकर सोच इतनी सीमित कैसे हो सकती है।

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कविता में शब्द रूपक होते हैं

कंगना ने तर्क दिया कि कविता या गीत में इस्तेमाल किए गए शब्द अक्सर रूपक होते हैं। कलाकार और कवि किसी खास भाव या प्रभाव को व्यक्त करने के लिए कल्पना और अलग-अलग उपमाओं का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को केवल धार्मिक रीति-रिवाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

वंदे मातरम आजादी की जंग की भावना है

कंगना ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावना से जुड़ा है। उनके मुताबिक, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने देश के भीतर की शक्ति और ऊर्जा को जगाने के लिए प्रेरित किया था।
उन्होंने इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचारों का भी उल्लेख किया और मजबूत, ऊर्जावान और आत्मविश्वासी युवाओं की जरूरत पर जोर दिया।

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हिंदू-मुसलमान वाली सोच से बाहर आएं

कंगना ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के संदर्भ में कहा कि वह किसी मौसम की भविष्यवाणी नहीं कर रहे थे, बल्कि ‘शक्ति’ के जागरण की बात कर रहे थे।

उन्होंने अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को केवल हिंदू-मुसलमान के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। कंगना ने कहा कि अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद ताकत को ‘शक्ति’ के रूप में समझा जा सकता है।

आइए एक-दूसरे को गले लगाएं

अपनी प्रतिक्रिया के अंत में कंगना ने शर्मिला टैगोर के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे को गले लगाना और आपसी प्रेम बनाए रखना जरूरी है। कंगना ने शर्मिला टैगोर के साथ अपने पुराने स्नेह का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें उनका प्यार भरा गले लगाना पसंद है।

Location :  New Delhi

Published :  21 August 2026, 2:48 PM IST

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