Delhi-NCR में स्वाइन फ्लू का प्रकोप: 1450 के पार पहुंचे मामले, जानिए किसे है सबसे ज्यादा खतरा और क्या हैं बचाव के उपाय

दिल्ली-एनसीआर में मानसून के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में भारी उछाल आया है। जानिये कैसे स्वाइन फ्लू फेफड़ों को प्रभावित करता है, किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है और कब इसे मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Updated : 21 August 2026, 2:55 PM IST
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New Delhi: दिल्ली-एनसीआर में मानसून के मौसम के साथ ही मौसमी बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में इस साल भारी उछाल देखने को मिला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मरीजों का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले लगभग छह गुना बढ़ चुका है। इस तेज बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ा दी हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने के बजाय सही समय पर सतर्कता बरतना ही सबसे बड़ा बचाव है।

क्यों खतरनाक रूप ले लेता है स्वाइन फ्लू?

शुरुआत में स्वाइन फ्लू एक सामान्य वायरल बुखार या सर्दी-जुकाम की तरह महसूस होता है। हालांकि, कई मामलों में यह वायरस फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर वहां के टिश्यू में गंभीर सूजन पैदा कर देता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित होने लगता है। स्थिति बिगड़ने पर यह वायरल निमोनिया का रूप ले सकता है, जिससे फेफड़े इतने कमजोर हो जाते हैं कि अन्य बैक्टीरिया भी आसानी से हमला कर सेकेंडरी इन्फेक्शन फैला देते हैं।

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कब बन जाती है मेडिकल इमरजेंसी?

H1N1 के हर मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती है। अधिकांश लोग सामान्य देखरेख, उचित तरल पदार्थों के सेवन और एंटीवायरल दवाओं से घर पर ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि मरीज बैठे-बैठे तेज सांस ले रहा है, छाती में जकड़न महसूस हो रही है, होंठ या उंगलियां नीली पड़ने लगी हैं, या अत्यधिक सुस्ती व मानसिक भ्रम की स्थिति बन रही है, तो यह तुरंत डॉक्टर के पास जाने का समय है। इसके अलावा, पल्स ऑक्सीमीटर में यदि ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से नीचे गिरता है, तो बिना देर किए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

किन लोगों को है सबसे ज्यादा जोखिम?

यह संक्रमण किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन कुछ खास वर्ग के लोगों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं-

गर्भवती महिलाएं: रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव के कारण इन्हें संक्रमण का अधिक खतरा रहता है।

छोटे बच्चे और बुजुर्ग: 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और पांच साल से कम उम्र के बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग: जिन्हें पहले से ही अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), डायबिटीज, हृदय रोग या मोटापे की समस्या है।

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बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है और उनमें फ्लू जैसे लक्षण (तेज बुखार, खांसी, बदन दर्द) दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और एंटीवायरल इलाज से गंभीर स्थिति जैसे एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) और वेंटिलेटर की नौबत से बचा जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  21 August 2026, 2:55 PM IST

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