हिंदी
डेंगू का बुखार (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: डेंगू का बुखार उतरते ही अक्सर घरों में राहत की सांस ली जाती है और लोग मान लेते हैं कि मरीज अब खतरे से पूरी तरह बाहर आ चुका है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की नजर में यह वह दौर है, जब लापरवाही सबसे भारी पड़ सकती है। बुखार कम होने के बाद के अगले 24 से 48 घंटे एक ऐसे चक्रव्यूह की तरह हैं, जहां मरीज की स्थिति अचानक पलट सकती है। यह बीमारी का वह चरण है जो मरीज को पूरी तरह ठीक होने का अहसास कराता है, लेकिन भीतर ही भीतर गंभीर रूप धारण कर सकता है।
मेडंता की रिपोर्ट के अनुसार, डेंगू का शुरुआती चरण आक्रामक बुखार का होता है। मच्छर काटने के लगभग 4 से 10 दिनों के भीतर यह संक्रमण सक्रिय होता है और 2 से 7 दिनों तक अपना असर दिखाता है।
शारीरिक प्रहार: इस दौरान तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे चुभन और जोड़ों व मांसपेशियों में असहनीय दर्द होता है।
पाचन और त्वचा पर असर: मतली, उल्टी, भूख मर जाना, चेहरे पर लालिमा और हल्के रैश भी इस चरण के आम लक्षण हैं। इस शुरुआती दौर में शरीर को संभालना और डॉक्टर की देखरेख में पर्याप्त तरल पदार्थ देना बेहद जरूरी होता है।
बीमारी का तीसरा से सातवां दिन यानी क्रिटिकल फेज सबसे ज्यादा जोखिम भरा होता है। इसी दौरान तापमान कम या पूरी तरह सामान्य हो जाता है, जिसे लोग रिकवरी समझने की भूल कर बैठते हैं।
अदृश्य खतरा: बुखार उतरने के बाद के 48 घंटों में ब्लड वेसेल्स (रक्त वाहिकाओं) से प्लाज्मा का रिसाव शुरू हो जाता है।
प्लेटलेट्स का पतन: इस प्रक्रिया में प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं और मरीज 'शॉक सिंड्रोम' की चपेट में आ सकता है। डेंगू का यह मनोवैज्ञानिक धोखा ही इसे सबसे खतरनाक बीमारियों में शुमार करता है, क्योंकि मरीज को सुधार लगता है जबकि अंदरूनी संकट गहरा रहा होता है।
बुखार उतरने के बाद यदि शरीर में कुछ विशेष बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत होती है-
पेट में तेज ऐंठन या छूने पर अत्यधिक दर्द होना।
एक दिन में तीन से ज्यादा बार लगातार उल्टी आना।
नाक, मसूड़ों से ब्लीडिंग या मल का रंग काला और तारकोल जैसा होना।
अत्यधिक सुस्ती, मानसिक उलझन, बेचैनी या तेज सांस चलना।
त्वचा का ठंडा, पीला पड़ना और बार-बार अत्यधिक प्यास लगना।
हर मरीज पर इस घातक चरण का असर एक जैसा नहीं होता, लेकिन कुछ लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए-
आयु वर्ग: 10 साल से छोटे बच्चे और 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग।
पहले से बीमार लोग: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या लिवर के पुराने मरीज।
दूसरी बार संक्रमण: जिन लोगों को पास्ट में पहले भी कभी डेंगू हो चुका है, उनके लिए री-इंफेक्शन जानलेवा साबित हो सकता है।
क्रिटिकल फेज की इस खतरनाक वैतरणी को पार करने के बाद मरीज की असली रिकवरी शुरू होती है। आमतौर पर छठे या सातवें दिन के बाद शरीर में सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं-
सुधार के संकेत: भूख फिर से जगने लगती है, कमजोरी घटने लगती है और प्लेटलेट्स का ग्राफ ऊपर उठने लगता है।
प्राकृतिक सफाई: शरीर में जमा अतिरिक्त फ्लूइड वापस ब्लड सरकुलेशन में लौटने लगता है, जिससे मरीज को बार-बार पेशाब आता है। इस दौरान त्वचा पर हल्की खुजली या रैश आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
Location : New Delhi
Published : 18 August 2026, 3:08 PM IST