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सिगरेट के धुएं से घुट रहा है फेफड़ों का दम (Img- Pinterest)
New Delhi: हमारे फेफड़े हर दिन लगभग 20 हजार बार सांस लेकर शरीर के हर एक अंग तक जीवनदायिनी ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। यही ऑक्सीजन हमें चलने, दौड़ने, सोचने और जीवित रहने की शक्ति देती है। लेकिन सिगरेट का हर एक कश इन जीवनदायी फेफड़ों पर सीधा हमला करता है।
इसका बुरा असर तुरंत भले ही दिखाई न दे, लेकिन यह धीरे-धीरे फेफड़ों की सांस लेने की क्षमता को खत्म कर देता है। लंबे समय तक स्मोकिंग करने से फेफड़ों को इतना गंभीर नुकसान पहुंचता है कि इंसान जानलेवा बीमारियों और लंग कैंसर की चपेट में आ जाता है।
जब कोई व्यक्ति सिगरेट का कश खींचता है, तो धुआं महज कुछ ही सेकेंडों में श्वास नली से होते हुए फेफड़ों की सबसे छोटी वायु थैलियों (एल्वियोली) तक पहुंच जाता है। सिगरेट के धुएं में 7,000 से ज्यादा जहरीले केमिकल्स और कैंसर पैदा करने वाले हानिकारक तत्व होते हैं।
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धुएं में मौजूद 'टार' फेफड़ों की अंदरूनी सतह पर जमने लगता है, जबकि कार्बन मोनोऑक्साइड खून में मिलकर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और फेफड़ों के खुद को साफ करने का प्राकृतिक सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में लंग कैंसर सबसे ज्यादा डायग्नोज होने वाले और मौत का कारण बनने वाले कैंसरों में शीर्ष पर है। वहीं, अमरीकी स्वास्थ्य एजेंसी 'सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) का कहना है कि लंग कैंसर से होने वाली 10 में से 9 मौतों की वजह सीधे तौर पर सिगरेट पीना या पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धुएं के संपर्क में आना) होती है। फेफड़ों के अलावा स्मोकिंग से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गले का कैंसर, आंखों की बीमारियां और मसूड़ों की गंभीर समस्याएं भी पैदा होती हैं।
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आज 'वर्ल्ड लंग्स डे' के मौके पर हमें अपने फेफड़ों की सेहत के प्रति गंभीर होने की जरूरत है। हेल्दी लंग्स स्पंज की तरह साफ और गुलाबी होते हैं, जबकि स्मोकर्स लंग्स टार जमने के कारण काले और अस्वस्थ हो जाते हैं। फेफड़ों को दोबारा मजबूत बनाने के लिए आज ही स्मोकिंग छोड़ें, प्राणायाम और योगाभ्यास करें, ताजी हवा में समय बिताएं और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खानपान अपनाएं।
Location : New Delhi
Published : 25 September 2026, 10:16 AM IST