Health News: DJ की धमक पर ज्यादा नाचे तो चली जाएगी जान? जानिये कितना खतरनाक है तेज आवाज और शोर

डीजे की धमक सिर्फ कानों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल के लिए भी जानलेवा बन रही है। तेज शोर से कार्डियक अरेस्ट का खतरा 3 गुना तक बढ़ जाता है। जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 24 September 2026, 10:24 AM IST
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New Delhi: शादी-ब्याह, रैलियों और त्योहारों में बजने वाला डीजे अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि लोगों की जान का दुश्मन बनता जा रहा है। बलरामपुर में तेज डीजे की वजह से एक बच्ची की असमय मौत ने इस ओर सबका ध्यान खींचा है।

एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो तेज शोर के कारण दिल की घबराहट, बीपी और कान की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो अत्यधिक तेज आवाज शरीर की पूरी विद्युत प्रणाली को अस्त-व्यस्त कर देती है।

दिल की धड़कन का अनियंत्रित होना और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन

एसएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ नागर के अनुसार, अत्यधिक शोर से शरीर में एड्रीनलीन हॉर्मोन का स्तर अचानक बढ़ जाता है। यह हॉर्मोन दिल की विद्युत प्रणाली पर असर डालता है और कोशिकाओं के सोडियम चैनल के काम में बाधा डालता है।

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इससे हृदय की धड़कनें दोगुनी से भी अधिक होकर बेकाबू हो जाती हैं, जिसे 'वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन' कहते हैं। इस हालत में दिल खून को पंप करना बंद कर देता है, जिससे कार्डियक अरेस्ट का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है और मरीज की ऑन-द-स्पॉट मौत हो जाती है। ब्रूगाडा सिंड्रोम के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक है।

हाई बीपी और बुजुर्गों पर सीधा प्रहार

मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल बताते हैं कि बहुत तेज शोरगुल सीधे व्यक्ति के ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है। इससे बीपी डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है, जो पहले से उच्च रक्तचाप के शिकार मरीजों और बुजुर्गों के लिए घातक साबित हो सकता है।

नियमों की अनदेखी के चलते अस्पतालों और रिहायशी इलाकों के पास बजने वाले लाउडस्पीकर बुजुर्गों की नींद, मानसिक शांति और दिल की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं।

कितना शोर है आपके कानों और दिल के लिए सुरक्षित?

ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रीतु गुप्ता के अनुसार, हमारे कानों के लिए 40 से 60 डेसिबल तक की आवाज ही सुरक्षित मानी जाती है। 60 से 90 डेसिबल की आवाज से तनाव, चिड़चिड़ापन और नींद न आने की समस्या होती है। वहीं, डीजे, सायरन और रॉक कॉन्सर्ट से निकलने वाली 100 से 140 डेसिबल की आवाज कान का पर्दा फाड़ सकती है और दिल के मरीजों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकती है।

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बचाव के आसान और जरूरी उपाय

1. तेज शोरगुल वाले स्थानों पर जाने से बचें और घरों की खिड़की-दरवाजे बंद रखें।
2. डीजे के पास जाना पड़े तो कानों में कॉटन (रूई) या इयरप्लग का इस्तेमाल करें।
3. वाहनों में प्रेशर हॉर्न पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और बिना वजह हॉर्न न बजाएं।
4. शासन और प्रशासन द्वारा तय किए गए डेसिबल मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।

Location :  New Delhi

Published :  24 September 2026, 10:24 AM IST

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