Lifestyle News: कब से शुरू हो रहा है खरमास, जानें क्या करें और क्या नहीं

खरमास 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 को समाप्त होगा। इस अवधि में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है और पूजा-पाठ, दान और तीर्थ यात्रा अत्यंत शुभ मानी जाती है। जानें इस महीने क्या करें, क्या न करें और इसका धार्मिक महत्व।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 27 November 2025, 4:13 PM IST
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New Delhi: हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व माना जाता है। यह वह अवधि है जब एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। साल 2025 का अंतिम खरमास 16 दिसंबर से शुरू होगा और 14 जनवरी 2026 को समाप्त होगा। इस अवधि में धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना प्राप्त होता है।

कब से शुरू हो रहा है खरमास?

दिसंबर 2025 में सूर्य देव 16 दिसंबर को सुबह 4:27 बजे अपने मित्र ग्रह बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। सूर्य के धनु राशि में गोचर करने के साथ ही खरमास की शुरुआत मानी जाती है। यह अवधि 30 दिनों तक चलेगी और 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगी।

क्यों लगता है खरमास?

साल में दो बार सूर्य के मीन या धनु राशि में प्रवेश करने पर खरमास लगता है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की सेवा में रहते हैं, जिससे सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का बल कम हो जाता है। इस वजह से शुभ कार्य करने पर मनचाहे फल नहीं मिलते, इसलिए मांगलिक कर्मों को इस अवधि में टालने की परंपरा है।

खरमास में क्या करें?

1. पूजा-पाठ

  • प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • गायत्री मंत्र या आदित्य हृदय स्त्रोत के पाठ का विशेष महत्व है।
  • भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा करें।
  • ध्यान रखें, रविवार और एकादशी को तुलसी में जल न चढ़ाएं।

2. स्नान और तीर्थ दर्शन

  • इस समय तीर्थ यात्रा को अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • जो लोग यात्रा नहीं कर पाते, वे घर पर स्नान के दौरान गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों का ध्यान करें।
  • पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी पुण्य प्राप्त होता है।

3. पाठ और कथा

भागवत गीता, रामायण या सत्यनारायण कथा का पाठ करें।

4. दान-पुण्य

  • जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, कंबल और धन का दान करें।
  • मान्यता है कि खरमास में किए गए दान से कई गुना फल प्राप्त होता है।

खरमास में क्या न करें?

इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। जैसे:

  • विवाह
  • गृह प्रवेश
  • नया व्यवसाय शुरू करना
  • सगाई
  • मुंडन

ग्रहों की कमजोर स्थिति के कारण इन कार्यों से शुभ फल नहीं मिलता, इसलिए परंपरा के अनुसार इन्हें मकर संक्रांति के बाद किया जाता है।

खरमास का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, खरमास आत्मविश्लेषण और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति जितना अधिक जप-तप, दान और साधना करता है, उतना ही अधिक पुण्य प्राप्त करता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 27 November 2025, 4:13 PM IST

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