UP शिक्षक भर्ती में ST आरक्षण पर उठे सवाल, कहीं शून्य तो कहीं गिनती के पद! देवरिया में ज्ञापन देकर दी आंदोलन की चेतावनी

उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती में अनुसूचित जनजाति के दो प्रतिशत आरक्षण को लेकर देवरिया में नया विवाद सामने आया है। भारतवर्षीय गौड़ आदिवासी महासभा ने कई भर्ती विज्ञापनों में आरक्षित पदों की संख्या पर सवाल उठाते हुए सरकार को ज्ञापन सौंपा है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 26 October 2026, 4:33 PM IST
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Deoria: उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी भर्ती विज्ञापनों में निर्धारित दो प्रतिशत आरक्षण के अनुरूप पद नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर भारतवर्षीय गौड़ आदिवासी महासभा ने जिला प्रशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपा है।

संगठन ने भर्ती विज्ञापनों की समीक्षा कर पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण का लाभ देने की मांग की है।

शिक्षक भर्ती के विज्ञापनों पर क्यों उठे सवाल?

महासभा के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भर्ती के लिए विज्ञापन संख्या 04/2026 से 08/2026 तक जारी किए हैं। संगठन का आरोप है कि इनमें अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित दो प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से पर्याप्त पद नहीं दर्शाए गए हैं।

महासभा ने अलग-अलग विज्ञापनों में पदों की संख्या का हवाला देते हुए सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का सही तरीके से पालन होना चाहिए, ताकि पात्र उम्मीदवारों को अपने अधिकार के अनुसार अवसर मिल सके।

शिक्षक भर्ती के विज्ञापनों पर उठे सवाल (Img: Dynamite News)

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कहीं दो पद, तो कहीं आरक्षण शून्य होने का दावा

भारतवर्षीय गौड़ आदिवासी महासभा की ओर से दिए गए विवरण के मुताबिक, विज्ञापन संख्या 04/2026 में सहायक आचार्य के 1,936 पदों के मुकाबले अनुसूचित जनजाति के लिए केवल दो पद दर्शाए गए हैं।

इसी तरह, विज्ञापन संख्या 05/2026 में कुल 11,508 पदों के सापेक्ष 198 पद होने की बात कही गई है। संगठन ने विज्ञापन संख्या 06/2026 में 2,607 पदों और विज्ञापन संख्या 08/2026 में प्रधानाचार्य के 1,475 पदों के मुकाबले अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण शून्य दिखाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

वहीं, विज्ञापन संख्या 07/2026 में 17,736 पदों के सापेक्ष केवल 13 पद दिए जाने का आरोप लगाया गया है। महासभा का कहना है कि इन आंकड़ों की समीक्षा कर आरक्षण के नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, इन दावों और विज्ञापनवार आरक्षण की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित आयोग के दस्तावेजों से होना बाकी है।

'पद नहीं मिलेंगे तो आवेदन कैसे करेंगे?'

महासभा के जिलाध्यक्ष मुंशी प्रसाद गौड़ ने कहा कि संगठन ने जिला प्रशासन के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति के कई युवा प्रयागराज, वाराणसी और दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि अगर भर्ती में निर्धारित आरक्षण के अनुरूप पद उपलब्ध नहीं होंगे, तो पात्र अभ्यर्थियों के सामने अवसरों को लेकर मुश्किल खड़ी हो सकती है। महासभा ने सरकार से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आरक्षण लागू करने और उम्मीदवारों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की है।

मांग पूरी नहीं हुई तो आगे क्या करेगी महासभा?

संगठन का कहना है कि भर्ती विज्ञापनों में आरक्षित पदों की संख्या को लेकर उठाई गई आपत्तियों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में निराशा है। महासभा ने सभी संबंधित विज्ञापनों की समीक्षा कर नियमानुसार आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।

जिलाध्यक्ष मुंशी प्रसाद गौड़ ने संकेत दिया कि ज्ञापन देना आंदोलन का पहला चरण है। आगे की रणनीति तय करने के लिए संगठन की बैठक की जाएगी।

Location :  Deoria

Published :  26 October 2026, 4:33 PM IST

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