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पहाड़ों से आने वाला पानी पीने को मजबूर ग्रामीण (Image Source: Dynamite News)
Mirzapur: मिरजापुर जिले के हलिया ब्लॉक की देवहट कटरा ग्रामसभा के लहुरिया दह मजरे में आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। करीब 700 से 800 कच्चे मकानों वाले इस गांव में ग्रामीणों को पीने के पानी, पक्के आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पहाड़ी पर बसे इस गांव की स्थिति ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल उठाती है।
लहुरिया दह मजरा देवहट कटरा से लगभग आठ किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में बसा है। दुर्गम रास्तों और सीमित सुविधाओं के बीच यहां के लोगों का जीवन आसान नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में आज भी बड़ी संख्या में कच्चे मकान हैं और कई परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
दावा है कि गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा है। ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जाएगा।
खाने पीने के लिए पहाड़ों का पानी इस्तेमाल करते हैं लोग (Image Source: Dynamite News)
गांव की सबसे बड़ी समस्याओं में पेयजल व्यवस्था शामिल है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों को आज भी पहाड़ी झरने से पानी लेना पड़ता है। स्वजल धारा मिशन के तहत बनी टंकी से तीन से चार दिन के अंतराल पर पानी मिलने की बात कही गई है। ऐसे में नियमित जलापूर्ति का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भी इस गांव की समस्या को सामने लाया था और यहां पानी पहुंचाने की व्यवस्था की थी। हालांकि, उनके स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में स्थानांतरण के कारणों और किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
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ग्रामीणों को उज्ज्वला योजना और वृद्धावस्था, विधवा तथा दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ मिलने की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। यदि पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
पहाड़ी झरने का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण (Image Source: Dynamite News)
लहुरिया दह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित क्षेत्र में होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। रिपोर्ट में ग्रामसभा के धन के इस्तेमाल और विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए पंचायत के अभिलेखों, भुगतान विवरण और सरकारी जांच की जरूरत है।
ग्राम प्रधान ने कथित तौर पर कहा कि पंचायत के अधिकांश काम ग्राम पंचायत अधिकारी देखते हैं और उन्होंने इस्तीफा देने की इच्छा भी जताई। इस संबंध में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
अब सवाल यह है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ इस गांव के पात्र परिवारों तक कब पहुंचेगा? जिला प्रशासन को पेयजल, आवास, स्वच्छता और पेंशन योजनाओं की स्थिति की जांच करानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें और कथित अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके।
Location : Mirzapur
Published : 26 October 2026, 4:17 PM IST