Varanasi Air Show 2026: वाराणसी एयर शो में 3 दिन में पहुंचे 37 लाख लोग, राफेल और सुखोई ने दिखाया दम

Varanasi Air Show में तीन दिनों के दौरान करीब 37 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किया गया। आखिरी दिन करीब 20 लाख दर्शकों ने प्रदर्शन देखा। लगभग 100 विमानों ने हिस्सा लिया। राफेल, सुखोई, तेजस, ब्रह्मोस से लैस विमान, महिला पायलटों और सूर्यकिरण-सारंग टीम के प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहे।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 26 October 2026, 3:52 PM IST
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Varanasi: गंगा के घाट, सामने बहती गंगा और ऊपर आसमान में दहाड़ते लड़ाकू विमान... महादेव की नगरी काशी में तीन दिन तक ऐसा नजारा दिखा, जिसे देखने के लिए लाखों लोग उमड़ पड़े। एयर शो के आखिरी दिन करीब 20 लाख दर्शकों के पहुंचने का दावा किया गया, जबकि तीन दिनों में दर्शकों की संख्या करीब 37 लाख बताई गई। लेकिन इस आयोजन में सिर्फ विमानों की कलाबाजी ही खास नहीं थी। सबसे ज्यादा चर्चा उस फॉर्मेशन की रही, जिसमें लड़ाकू विमानों ने फुल ऑपरेशनल लोड के साथ उड़ान भरी।

आखिर इस एयर शो में ऐसा क्या था खास?

काशी के आसमान में भारतीय वायुसेना के करीब 100 विमानों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिग-29, जगुआर, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस जैसे लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरकर दर्शकों का ध्यान खींचा।

इस प्रदर्शन की सबसे अहम खासियत प्रचंड फॉर्मेशन रही। वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर जयदीप सिंह के मुताबिक, इसमें लड़ाकू विमानों ने अपनी परिचालन भूमिका से जुड़े हथियारों और उपकरणों के साथ उड़ान भरी। इस फॉर्मेशन में ब्रह्मोस मिसाइल से लैस विमान भी शामिल था।

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काशी के आसमान में भारतीय वायुसेना (Source: X)

ब्रह्मोस मिसाइल और फुल ऑपरेशनल लोड ने क्यों खींचा ध्यान?

आमतौर पर एयर शो में लड़ाकू विमानों की गति, तालमेल और हवाई करतब दर्शकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन फुल ऑपरेशनल लोड के साथ उड़ान का महत्व इससे आगे है। इसका मतलब है कि विमान अपनी परिचालन भूमिका से जुड़े हथियारों और उपकरणों के साथ उड़ान भरता है।

यही वजह रही कि काशी का यह फ्लाईपास्ट सिर्फ एक हवाई प्रदर्शन नहीं, बल्कि वायुसेना की युद्धक तैयारी और परिचालन क्षमता की झलक दिखाने वाला आयोजन भी बना।

जब आसमान में उतरी काशी की पहचान

इस एयर शो में काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी खास जगह दी गई। महादेव, नटराज, कैलाश, विश्वनाथ, त्रिदेव, हनुमान, ओंकार, भागीरथी, रुद्र और सारनाथ जैसे नामों वाले फॉर्मेशन ने आयोजन को काशी की पहचान से जोड़ा।

वहीं सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के करतबों ने दर्शकों को रोमांचित किया। आसमान में विमानों का सटीक तालमेल और हेलीकॉप्टरों की उड़ान देखने के लिए घाटों पर लोगों की भीड़ जुटी रही।

महिला पायलटों ने भी दिखाया दम

इस आयोजन में महिला पायलटों की भागीदारी भी चर्चा में रही। सात महिला पायलटों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। इनमें सुखोई-30 एमकेआई उड़ाने वाली महिला पायलट भी शामिल रहीं। उनकी भागीदारी ने वायुसेना में महिलाओं की भूमिका और उनके कौशल को सामने रखा।

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तीन दिन में 37 लाख लोग, काशी में क्यों याद रखा जाएगा यह शो?

एयर शो के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। तीन दिनों में लाखों लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल कर दिया।

काशी में इस आयोजन की खासियत तीन चीजों का एक साथ दिखना रही—गंगा के ऊपर लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन, फुल ऑपरेशनल लोड के साथ उड़ान और शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी फॉर्मेशन। यही वजह है कि यह एयर शो केवल आसमान में दिखे करतबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वायुसेना की क्षमता और काशी की पहचान को जोड़ने वाला आयोजन बन गया।

Location :  Varanasi

Published :  26 October 2026, 3:52 PM IST

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