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गुलाबी मीनाकारी के फाइटर प्लेन ने मचाई धूम (Img: Dynamite News)
Varanasi: गंगा के ऊपर भारतीय वायुसेना के शौर्य का प्रदर्शन हुआ, तो काशी के एक शिल्पकार ने अपने हुनर से देशप्रेम की ऐसी तस्वीर बनाई, जिसने सबका ध्यान खींचा। गुलाबी मीनाकारी से तैयार लड़ाकू विमान की अनूठी कलाकृति अब देश ही नहीं, विदेशों में भी लोगों को आकर्षित कर रही है।
खास बात यह है कि चांदी से बने इस फाइटर प्लेन को तैयार करने में करीब एक महीने की मेहनत लगी है और इसकी तस्वीर सामने आने के बाद करीब 100 पीस के ऑर्डर मिल चुके हैं। कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी इसकी मांग आई है।
वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने जहां लोगों को भारतीय वायुसेना की ताकत और पराक्रम से रूबरू कराया, वहीं इस आयोजन ने काशी के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह को एक नया विचार दिया। उन्होंने गुलाबी मीनाकारी की बारीक कारीगरी से लड़ाकू विमान की अनुकृति तैयार कर दी।
यह कलाकृति काशी की पारंपरिक कला और आधुनिक भारत की सैन्य शक्ति के मेल को दिखाती है। कुंज बिहारी सिंह इस कलाकृति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित करना चाहते हैं।
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कुंज बिहारी सिंह के मुताबिक, एयर शो की जानकारी मिलते ही उन्होंने लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी। इस कलाकृति को पूरा करने में करीब एक महीने का समय लगा। इसे बनाने में 400 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है।
शिल्पकार बताते हैं कि गुलाबी मीनाकारी में हमेशा कुछ नया करने की कोशिश रहती है। इस बार भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन ने उन्हें ऐसी कलाकृति बनाने की प्रेरणा दी, जो देश की सैन्य शक्ति के साथ काशी की पारंपरिक कला को भी दुनिया के सामने पेश कर सके।
फाइटर प्लेन की तस्वीर कुछ ग्राहकों को भेजने के बाद कुंज बिहारी सिंह को करीब 100 पीस के ऑर्डर मिले। इनमें कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से आई मांग भी शामिल है। इस उत्पाद को अलग-अलग आकारों में तैयार करने की मांग सामने आ रही है।
यह प्रतिक्रिया काशी के पारंपरिक शिल्प के लिए नए बाजार खुलने की संभावना दिखाती है। इससे स्थानीय कारीगरों को काम के नए अवसर मिल सकते हैं और गुलाबी मीनाकारी को देश-विदेश में अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कुंज बिहारी सिंह इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गुलाबी मीनाकारी से ब्रह्मोस मिसाइल की अनुकृति भी बना चुके हैं। उनके अनुसार, उस कलाकृति को भी देश-विदेश में पसंद किया गया था। अब फाइटर प्लेन की अनुकृति के जरिए वह पारंपरिक कला को समकालीन विषयों से जोड़ रहे हैं। उनका प्रयास है कि गुलाबी मीनाकारी केवल सजावटी सामान तक सीमित न रहे, बल्कि देश की उपलब्धियों, सैन्य पराक्रम और राष्ट्रीय गौरव को भी अपने भीतर समेटे।
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कुंज बिहारी सिंह का कहना है कि योगी सरकार की ओर से जीआई और ओडीओपी उत्पादों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए किए जा रहे प्रयासों से गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिली है।
उनके मुताबिक, आर्थिक सहायता, निःशुल्क टूल किट, प्रशिक्षण और उत्पादों की बेहतर पैकिंग से जुड़े अवसरों ने इस पारंपरिक हस्तशिल्प को आगे बढ़ाने में मदद की है। सरकारी संरक्षण और प्रोत्साहन से इस कला के प्रति युवाओं की रुचि फिर बढ़ रही है। जो युवा पीढ़ी पहले इस पारंपरिक कला से दूर हो रही थी, अब वह दोबारा इससे जुड़ने लगी है। इससे शिल्प परंपरा को आगे बढ़ाने और कारीगरों की आजीविका के नए अवसर पैदा होने की संभावनाएं हैं।
वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी अपनी बारीक कारीगरी, आकर्षक रंगों और पारंपरिक शिल्प शैली के लिए जानी जाती है। ओडीओपी यानी एक जिला, एक उत्पाद और जीआई यानी भौगोलिक संकेतक से जुड़ी इस कला को नए प्रयोगों के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
Location : Varanasi
Published : 23 October 2026, 7:36 PM IST