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दुनिया में नशे का इस्तेमाल फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: दुनिया में नशे की समस्या अब केवल किसी एक देश, शहर या उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट ने इस संकट की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनिया भर में करीब 33.1 करोड़ लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया। यानी 15 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में हर 16 में से लगभग एक व्यक्ति ने बीते 12 महीनों में किसी न किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया। पिछले एक दशक में यह संख्या 34 प्रतिशत बढ़ी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के साथ-साथ नए सिंथेटिक ड्रग्स और इलाज तक सीमित पहुंच की चुनौती भी बढ़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र की ड्रग्स और अपराध से जुड़ी संस्था UNODC की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2026 के अनुसार, दुनिया में नशे का इस्तेमाल बढ़ने के पीछे केवल व्यक्तिगत आदतें नहीं, बल्कि कई व्यापक चुनौतियां भी हैं। नशीले पदार्थों की उपलब्धता, अवैध कारोबार का विस्तार, सामाजिक अस्थिरता और कमजोर वर्गों की परिस्थितियां इस समस्या को प्रभावित करती हैं।
रिपोर्ट का एक अहम संकेत यह है कि नशे का बाजार लगातार बदल रहा है। तस्करी से जुड़े नेटवर्क नए बाजारों तक पहुंच रहे हैं और अलग-अलग प्रकार के पदार्थ उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में केवल गिरफ्तारी और जब्ती के जरिए इस समस्या को पूरी तरह समझना संभव नहीं है। नशे की मांग, उसकी उपलब्धता और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर एक साथ ध्यान देने की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, कैनाबिस दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ बना हुआ है। वर्ष 2024 में करीब 25.6 करोड़ लोगों ने इसका इस्तेमाल किया। इसके बाद गैर-चिकित्सकीय इस्तेमाल वाले ओपिओइड का स्थान रहा, जिनके इस्तेमाल करने वालों की अनुमानित संख्या 6.3 करोड़ थी।
इसी अवधि में लगभग 3.2 करोड़ लोगों ने एम्फेटामाइन, 2.5 करोड़ लोगों ने कोकीन और 2.1 करोड़ लोगों ने एक्स्टेसी का इस्तेमाल किया। ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर नशे की समस्या किसी एक पदार्थ तक सीमित नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों और उनसे जुड़े जोखिमों में भी अंतर है।
नशे की दुनिया में सबसे तेजी से बदलते पहलुओं में सिंथेटिक यानी रासायनिक तरीके से बनाए जाने वाले पदार्थ शामिल हैं। UNODC की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में दुनिया भर में 755 नए साइकोएक्टिव पदार्थ दर्ज किए गए। इनमें 118 पदार्थ ऐसे थे, जिनकी पहली बार रिपोर्टिंग हुई। यह किसी एक वर्ष में दर्ज किए गए ऐसे पदार्थों की सबसे बड़ी संख्या बताई गई है।
इन पदार्थों को लेकर चिंता इसलिए भी है क्योंकि उनकी रासायनिक संरचना, ताकत और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में किसी पदार्थ की वास्तविक संरचना और उसमें मौजूद अन्य रसायनों की जानकारी के बिना उसका सेवन गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों और नशा नियंत्रण एजेंसियों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी होती हैं।
रिपोर्ट में कोकीन के वैश्विक बाजार को लेकर भी चिंता जताई गई है। वर्ष 2024 में दुनिया भर में कोकीन का अवैध उत्पादन लगभग 4,100 टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो एक दशक पहले की तुलना में तीन गुने से अधिक है। इसके साथ ही तस्करी के नेटवर्क नए क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रहे हैं।
यह स्थिति बताती है कि नशीले पदार्थों की समस्या को केवल स्थानीय कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति नेटवर्क, संगठित अपराध और सीमापार सहयोग से भी है। नशीले पदार्थों की तस्करी से होने वाला मुनाफा कई जगह संगठित अपराध को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे में अवैध कारोबार के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की मांग को कम करने के प्रयास भी जरूरी हैं।
इस संकट का सबसे चिंताजनक पहलू इलाज तक पहुंच का अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में करीब 6.3 करोड़ लोग ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। इसके बावजूद हर 12 में से लगभग एक व्यक्ति तक ही किसी तरह का उपचार पहुंच पा रहा था।
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महिलाओं के मामले में यह अंतर और बड़ा दिखाई देता है। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, नशे से जुड़ी समस्याओं वाली हर 23 महिलाओं में से लगभग एक को इलाज मिल रहा था, जबकि पुरुषों में हर नौ में से एक को उपचार उपलब्ध था। यह अंतर दिखाता है कि इलाज की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
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नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को केवल अपराधी के रूप में देखने से उपचार की जरूरत पीछे छूट सकती है। विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक उपचार, काउंसलिंग, परिवार का सहयोग और पुनर्वास जैसे उपाय लोगों को नशे से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं।
नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वैश्विक आंकड़े संकेत देते हैं कि केवल आपूर्ति पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। रोकथाम, जागरूकता, समय पर उपचार और पुनर्वास को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी।
युवाओं को नशे के स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बारे में सही जानकारी देना, जरूरतमंद लोगों के लिए गोपनीय और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना तथा परिवारों को सहायता देना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकते हैं। साथ ही, नशे से जुड़ी समस्या को छिपाने या उससे जूझ रहे लोगों को सामाजिक रूप से अलग करने के बजाय मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 26 October 2026, 4:48 PM IST
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