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लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी का गेट सील करने के फैसले के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। नमाज स्थल बंद करने के आरोपों के बीच भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने इमारत को जर्जर बताते हुए सुरक्षा कारणों से कार्रवाई की बात कही।
गेट बंद करने के फैसले पर विवाद (Img- Internet)
Lucknow: लखनऊ विश्वविद्यालय में लाल बारादरी के दरवाजे को सील किए जाने के विरोध में छात्रों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्र संगठनों ने प्रशासन के इस फैसले को मनमाना बताते हुए जमकर नारेबाजी की। परिसर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई।
एनएसयूआई और आइसा से जुड़े छात्रों का आरोप है कि रमजान के दौरान नमाज पढ़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले स्थान को बंद किया गया है। छात्रों का कहना है कि यह फैसला मुस्लिम विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण है। उन्होंने लाल बारादरी के दरवाजे को सील करने के विरोध में हंगामा किया और प्रशासन से निर्णय वापस लेने की मांग की।
विवाद बढ़ने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी भी प्रदर्शन के विरोध में सामने आए। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने छात्र नेताओं से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच मतभेद कायम रहे।
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विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि लाल बारादरी की इमारत काफी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है और किसी भी समय गिर सकती है। निर्माण अधीक्षक डॉ. श्यामलेश के अनुसार, भवन की स्थिति को देखते हुए वहां से यूको बैंक और स्टाफ क्लब को पहले ही हटा दिया गया था। इमारत में प्रवेश वर्जित करने के लिए बोर्ड भी लगाए गए थे, बावजूद इसके छात्र अंदर जाकर रील बनाते थे।
लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन
➡️लाल बारादरी का गेट बंद करने पर विवाद
➡️प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन
➡️रमजान में नमाज पढ़ने गये छात्रों ने जताया था विरोध
➡️मौके पर भारी पुलिस बल तैनात, चारों ओर से बैरिकेडिंग#LucknowUniversity #Protest #UttarPradesh… pic.twitter.com/t2XEIWXZpG— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) February 23, 2026
प्रशासन का कहना है कि जान-माल के नुकसान की आशंका को देखते हुए लाल बारादरी के टूटे दरवाजे को चुनाई कर बंद किया गया है और बाहर जाली लगाने का कार्य शुरू किया गया था। इसी कार्रवाई का छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। कुलसचिव भावना मिश्रा ने पहले ही हसनगंज थाना प्रभारी को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय का किसी समुदाय विशेष से कोई संबंध नहीं है। लाल बारादरी के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से पत्राचार किया जा रहा है। यदि आवश्यक धनराशि उपलब्ध होती है तो इमारत का पुनर्निर्माण या संरक्षण कार्य कराया जाएगा।
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स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन लाल बारादरी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।