स्वर की अमर विरासत: आशा भोसले के गीतों में आज भी जिंदा है नैनीताल का जादू

दिग्गज गायिका आशा भोंसले के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर है। नैनीताल, रानीखेत और उत्तराखंड से जुड़े उनके सदाबहार गीत आज भी लोगों के दिलों में उनकी यादें ताज़ा करते हैं।

Nainital: भारतीय संगीत जगत में रविवार का दिन एक ऐसे सन्नाटे के साथ आया, जिसने हर संगीत प्रेमी के दिल को झकझोर दिया। दिग्गज गायिका आशा भोंसले ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी आवाज़ अब भी हवा में कहीं गूंजती हुई महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे उनके गाए गीत अब सिर्फ रिकॉर्ड नहीं रहे, बल्कि यादों और एहसासों में हमेशा के लिए बस गए हों। खासतौर पर उत्तराखंड की वादियों से जुड़े उनके गीत आज भी नैनीताल और रानीखेत की खूबसूरती को जीवंत कर देते हैं।

नैनीताल की वादियों में गूंजती रही आशा भोंसले की आवाज़

आशा भोंसले की आवाज़ सिर्फ संगीत नहीं थी, बल्कि एक एहसास थी, जिसने कई फिल्मों को अमर बना दिया। नैनीताल की वादियों में फिल्माए गए उनके गीत आज भी लोगों को उसी दौर में ले जाते हैं, जब सिनेमा और प्रकृति का मेल जादू पैदा करता था।

फिल्म गुमराह में सुनील दत्त और माला सिन्हा पर फिल्माया गया गीत “इन हवाओं में, इन फिजाओं में…” आज भी नैनीताल की ठंडी हवाओं और हरियाली को आंखों के सामने ला देता है। यह गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक याद बन चुका है जो आज भी लोगों के दिलों में ताजा है।

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फिल्मों ने दिलाई अलग पहचान

आशा भोंसले के गाए गीतों ने नैनीताल को फिल्मी दुनिया में एक खास पहचान दी। फिल्म कटी पतंग का मशहूर गीत “मेरा नाम है शबनम…” के कुछ हिस्से भी यहीं फिल्माए गए थे, जिसने इस शहर की खूबसूरती को देशभर में पहुंचाया। इसके अलावा फिल्म “बेटी” का गीत “लहंगा मंगा दे मेरे बाबू आज नैनीताल से…” भी इस शहर के नाम को और लोकप्रिय बनाने में अहम साबित हुआ। इन गीतों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं दिया, बल्कि नैनीताल को एक रोमांटिक फिल्मी पहचान भी दी।

रानीखेत की वादियों में भी गूंजी उनकी मधुर आवाज़

नैनीताल के अलावा रानीखेत भी आशा भोंसले के गीतों की गूंज से अछूता नहीं रहा। फिल्म दिल दे के देखो में उनके गाए गीत “यार चुलबुला है…” ने संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह बनाई। इतिहासकारों के अनुसार, यह फिल्म कई मायनों में महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह आशा पारेख और संगीतकार उषा खन्ना के करियर की शुरुआती सफल फिल्मों में से एक थी। इसके बाद 1972 में आई फिल्म हनीमून की पूरी शूटिंग रानीखेत में हुई, जिसमें उनका गाया गीत “मेरे प्यासे मन की बहार…” लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

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उत्तराखंड से रहा गहरा भावनात्मक रिश्ता

उत्तराखंड से आशा भोंसले का रिश्ता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह यहां की संस्कृति और प्रकृति से भी गहराई से जुड़ी थीं। वे कई बार यहां आने की इच्छा जताती थीं। वर्ष 2002-03 में अल्मोड़ा महोत्सव में उनके शामिल होने की योजना भी बनी थी, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वे नहीं आ पाईं। उस कार्यक्रम में उनकी बहन उषा मंगेशकर ने मंच संभालकर प्रस्तुति दी थी।

गढ़वाली संगीत में भी बिखेरा अपनी आवाज़ का जादू

आशा भोंसले ने सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संगीत में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने गढ़वाली फिल्म ग्वेर छोरा के लिए “जनमो को साथ छे…” गीत गाया, जो एक चरवाहे के जीवन और उसकी भावनाओं को दर्शाता है।

Location :  Nainital

Published :  13 April 2026, 4:57 PM IST

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