Maharajganj News: बोरे की किल्लत और भुगतान में देरी से किसान बेहाल; पढ़ें पूरी खबर

महराजगंज में गेहूं खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था चरम पर है। बोरे की कमी, कर्मचारियों की अनुपस्थिति और भुगतान में देरी से किसान परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कई किसान सरकारी केंद्रों से दूरी बनाकर बिचौलियों को कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 17 April 2026, 1:01 PM IST
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Maharajganj: उत्तर प्रदेश में महराजगंज जनपद समेत पूरे प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 30 मार्च से शुरू हो चुकी है, जो 15 जून तक जारी रहेगी। सरकार ने किसानों के हित में समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, साथ ही 20 रुपये प्रति क्विंटल पल्लेदारी भी देने का प्रावधान किया गया है।

कागजों पर यह व्यवस्था किसानों के लिए लाभकारी दिखती है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। जनपद के कई गेहूं क्रय केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम है। कहीं बोरे की भारी कमी है तो कहीं जिम्मेदार कर्मचारी ही केंद्रों से गायब मिल रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसान अपने गेहूं को बेचने के लिए बार-बार केंद्रों का चक्कर काटने को मजबूर हैं।

बोरे की कमी और लापरवाही से किसान बेहाल

साधन सहकारी समिति पकड़ी खुर्द के खेलपिपरा स्थित क्रय केंद्र का हाल भी कुछ अलग नहीं है। यहां पहुंचे किसानों ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं। किसान अमेरिका गुप्ता, रामशंकर, पन्नेलाल, जयराम पटेल और अलाउद्दीन ने बताया कि केंद्र पर बोरे की भारी किल्लत है।

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उनका कहना है कि कई बार गेहूं लेकर आने के बावजूद खरीद नहीं हो पाती। बोरे उपलब्ध न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि परिवहन खर्च भी बढ़ जाता है।
किसानों ने यह भी बताया कि केंद्रों पर कर्मचारी समय से नहीं आते या कई बार अनुपस्थित रहते हैं। इससे प्रक्रिया और भी धीमी हो जाती है। किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य अच्छा होने के बावजूद यदि समय पर खरीद नहीं होगी, तो इसका कोई फायदा नहीं मिल पाएगा।

भुगतान में देरी और बिचौलियों का बढ़ता दखल

किसानों की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि गेहूं बेचने के बाद भी भुगतान समय पर नहीं मिलता। कई किसानों को अपने परिवार के खर्च और अगली फसल की तैयारी के लिए पैसों की तत्काल जरूरत होती है, लेकिन भुगतान में देरी के कारण उन्हें कर्ज लेने तक की नौबत आ जाती है।

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उधर, क्रय केंद्र के सचिव शिवमंगल गुप्ता ने भी बोरे की कमी को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि कई बार उच्चाधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। वे खुद भी लगातार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, फिर भी बोरे की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही।

सरकारी क्रय केंद्रों की इस अव्यवस्था का सीधा लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। मजबूरी में किसान अपने गेहूं को सरकारी समर्थन मूल्य से कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और सरकार की खरीद व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

Location :  Maharajganj

Published :  17 April 2026, 1:01 PM IST

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