UP News: रिटायरमेंट से एक दिन पहले सहायक लेखाकार बर्खास्त, 11 लाख जुर्माने के साथ ठहराया गया दोषी; पढ़ें पूरा मामला

गोरखपुर में सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को रिटायरमेंट से एक दिन पहले बर्खास्त कर 11 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। बागपत में 1.69 करोड़ रुपये के गबन में शामिल पाए गए, विभाग ने कठोर कार्रवाई की। क्या है पूरा मामला पढ़ें इस खबर में…।

Updated : 1 January 2026, 1:06 PM IST
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Gorakhpur: बिजली निगम के उप मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय गोरखपुर में तैनात सहायक लेखाकार ईशपाल सिंह को सेवानिवृत्ति के एक दिन पहले 30 दिसंबर को बर्खास्त कर दिया गया। उन पर बागपत जिले में सहायक लेखाकार रहते हुए भारी गबन करने का आरोप है। इस मामले की जांच गोरखपुर जोन प्रथम के मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने की। जांच के बाद ईशपाल सिंह को दोषी पाया गया और उनके खिलाफ 11 लाख छह हजार 457 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।

बिजली विभाग में अंतिम दिनों में बड़ा प्रशासनिक फैसला

ईशपाल सिंह की बागपत में तैनाती 27 फरवरी, 2016 से 29 मई, 2018 तक थी। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन तकनीशियन ग्रेड दो (टीजी-2) सुरेश बाबू के साथ मिलकर लगभग 1 करोड़ 69 लाख 52 हजार 473 रुपये का गबन किया। यह धनराशि उपभोक्ताओं से बिजली बिल के रूप में 25 रसीद बुकों के माध्यम से ली गई थी, लेकिन इसे निगम के खातों में जमा नहीं किया गया। इनमें से 12 रसीद बुकें सीधे ईशपाल सिंह के नाम से जारी की गई थीं।

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ईशपाल सिंह का तबादला 28 मई 2018 को पश्चिमांचल से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में कर दिया गया था। अगले दिन, 29 मई 2018 को उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। इस मामले में एफआईआर 16 मई 2019 को बागपत थाने में दर्ज कराई गई थी।

विभाग में सख्त कार्रवाई का अलर्ट

एफआईआर में तत्कालीन अधिशासी अभियंता राजीव कुमार आर्य ने ईशपाल सिंह के साथ ही सुरेश बाबू, कार्यकारी सहायक\मुख्य खजांची राजीव कुमार गौड़, विकल्प महेश, और राजवीर सिंह को आरोपित बनाया गया था। ये सभी विभिन्न समय पर विद्युत वितरण खंडों और उपकेंद्रों में तैनात थे।

बागपत खंड में हुए गबन की जांच में यह सामने आया कि ईशपाल सिंह और उनके सहयोगी ने निगम के खातों में रकम जमा न करके निजी फायदे के लिए यह धनराशि हड़प ली। मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि जांच पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की गई और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया गया।

1.69 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला 

ईशपाल सिंह के खिलाफ निगम के प्रबंध निदेशक ने 30 दिसंबर को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। इसके साथ ही उनके ऊपर 11,06,457 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यह कार्रवाई विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार को रोकने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

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बागपत और गोरखपुर विद्युत वितरण खंडों में यह मामला एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि कर्मचारी किसी भी वित्तीय गड़बड़ी में लिप्त होने पर बच नहीं सकते। अधिकारियों ने कहा कि निगम भविष्य में भी ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखेगा और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 1 January 2026, 1:06 PM IST

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