बदायूं पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, राम मंदिर से लेकर सरकार तक कई मुद्दों पर उठाए सवाल, बोले- असली जिम्मेदारों को…

बदायूं पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर ट्रस्ट, चंदा विवाद, नौकरी के वादे और सरकारी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए। उनके आरोपों ने बड़े अधिकारियों और ट्रस्ट की भूमिका पर भी चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि छोटे लोगों को फंसाया जा रहा है और असली जिम्मेदार बाहर हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 27 June 2026, 5:28 PM IST
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Budaun: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की यात्रा आज बदायूं पहुंची, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयानों ने एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है।

‘बड़े लोगों को बचाया जा रहा है, छोटे फंसे’

शंकराचार्य ने राम मंदिर चंदा विवाद पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस मामले में असली जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है और छोटे कर्मचारियों को फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “बड़े अधिकारियों और ट्रस्ट से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को दोषी ठहराया जा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर वास्तव में जांच हो रही है, तो सभी जिम्मेदारों की भूमिका सामने आनी चाहिए।

राम मंदिर ट्रस्ट पर गंभीर सवाल

शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले ही यह सुझाव दिया गया था कि जिन लोगों ने अयोध्या आंदोलन में भाग लिया, उन्हीं को ट्रस्टी बनाया जाना चाहिए था या संतों को शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन उनके अनुसार सरकार ने अपने भरोसेमंद लोगों को ट्रस्ट में बैठाया और निर्णय लेने की प्रक्रिया को अपने अनुसार नियंत्रित किया।

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नौकरी के वादों पर सरकार को घेरा

शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2 करोड़ नौकरियों के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि यह वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरी की कमी के कारण छोटे कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया और उन्हें गलत काम करने के लिए मजबूर किया गया। उनके अनुसार, ऊपर के अधिकारियों के आदेश पर ही कई गलत फैसले लिए गए।

‘ऊपर से मिली मंजूरी, नीचे फंसे लोग’

उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों ने कुछ गलत किया भी है तो इसके पीछे दबाव और आदेश देने वाले लोग भी जिम्मेदार हैं। शंकराचार्य ने कहा कि अगर उन्हें नौकरी खोने का डर न होता तो शायद वे ऐसे काम नहीं करते। इसलिए पूरे सिस्टम की जांच होनी चाहिए, न कि केवल निचले स्तर के लोगों को दोषी ठहराया जाए।

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‘कालनेमि’ वाले बयान पर भी दिया जवाब

जब उनसे “कालनेमि” जैसे शब्दों पर सवाल पूछा गया, तो शंकराचार्य ने कहा कि वे भगवा वस्त्र पहनते हैं और उन्होंने किसी भी जीव की हत्या नहीं की है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ भी भगवा पहनते हैं, जो अहिंसा का प्रतीक है। इसके बावजूद उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार पशुओं के वध को अनुमति देती है तो असली सवाल किस पर उठना चाहिए?

‘अंदर से कौन कालनेमि है, बाहर से साधु कौन’

उन्होंने आगे कहा कि असली पहचान आचरण से होती है। उनके अनुसार, जो बाहर से साधु दिखाई दे लेकिन अंदर से गलत कार्य करे, वही असली रूप से सवालों के घेरे में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके आचरण पर सवाल उठाना आसान है, लेकिन असली जवाबदेही को समझना ज्यादा जरूरी है।

Location :  Budaun

Published :  27 June 2026, 5:28 PM IST

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