NDA का बढ़ेगा कुनबा? DMK और NCP की एंट्री से बदलेंगे समीकरण, देखें किसको होगा फायदा और किसको नुकसान?

केंद्र की राजनीति में बड़े सियासी बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। खबर है कि द्रमुक और शरद पवार की एनसीपी NDA में शामिल हो सकती हैं। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, संसद में संख्या बल और परिसीमन जैसे मुद्दों को लेकर भाजपा नए समीकरण बनाने में जुटी है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 14 August 2026, 11:17 AM IST
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New Delhi: केंद्र की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) अपने कुनबे को और मजबूत करने की तैयारी में जुटा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक पार्टी द्रमुक (DMK) को NDA में शामिल करने को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है। इसके साथ ही शरद पवार की एनसीपी को भी गठबंधन में लाने की कोशिशें तेज होने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर द्रमुक और एनसीपी जैसे दल NDA के साथ आते हैं तो इसका सीधा असर विपक्षी खेमे पर पड़ेगा। संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार से पहले इन दलों के साथ सियासी समीकरण साधने की कोशिश की जा रही है।

द्रमुक को मिल सकती है केंद्र में बड़ी भूमिका

सूत्रों के अनुसार द्रमुक और NDA के बीच सहमति बनने की खबरें हैं। द्रमुक के दोनों सदनों में करीब 30 सांसद हैं और पार्टी केंद्र सरकार में हिस्सेदारी चाहती है। चर्चा है कि द्रमुक को मोदी मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद मिल सकते हैं। वहीं, शरद पवार की एनसीपी के साथ आने की स्थिति में उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके अलावा भाजपा पुराने सहयोगी अकाली दल को भी दोबारा NDA में लाने की संभावनाएं तलाश रही है।

संसद में बढ़ेगा NDA का आंकड़ा

द्रमुक और एनसीपी के NDA में शामिल होने से संसद में सरकार की संख्या काफी मजबूत हो सकती है। वर्तमान में लोकसभा में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास करीब 325 सांसद हैं। अगर द्रमुक के 22 लोकसभा सांसद और एनसीपी के आठ सांसद NDA के साथ आते हैं तो यह संख्या बढ़कर करीब 355 तक पहुंच सकती है। लोकसभा में किसी भी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 सांसदों का है। यानी सरकार इस आंकड़े से सिर्फ पांच सांसद दूर रह जाएगी। राज्यसभा में भी NDA की स्थिति और मजबूत हो सकती है। फिलहाल निर्दलीय और मनोनीत सदस्यों को मिलाकर NDA के पक्ष में करीब 154 सांसद हैं। द्रमुक के आठ और एनसीपी के एक सांसद के समर्थन से यह संख्या 163 तक पहुंच सकती है। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्यों की जरूरत होती है, यानी सरकार महज एक सदस्य पीछे रह जाएगी।

परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर बड़ी रणनीति?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की यह कवायद सिर्फ गठबंधन विस्तार तक सीमित नहीं है। इसके पीछे संसद में जरूरी संख्या बल जुटाने और आने वाले बड़े फैसलों को आसानी से आगे बढ़ाने की रणनीति भी हो सकती है। खास तौर पर परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को व्यापक समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में नए सहयोगियों को जोड़ना भाजपा की बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

तमिलनाडु में कांग्रेस-द्रमुक रिश्तों में आई दूरी

तमिलनाडु की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने द्रमुक और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस के चुनाव पूर्व गठबंधन से अलग होकर टीवीके के साथ जाने के बाद द्रमुक और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ने की चर्चा शुरू हुई। हाल में परिसीमन को लेकर टीवीके की बैठक में भी द्रमुक सांसदों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी। वहीं संसद के आखिरी दिन लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया, लेकिन द्रमुक नेता कनिमोझी की मौजूदगी ने नए राजनीतिक संकेतों को हवा दी।

एनसीपी भी परिसीमन पर दे चुकी है संकेत

शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले पहले ही परिसीमन को लेकर अपनी पार्टी का रुख साफ कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि अगर लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जाती है तो उनकी पार्टी परिसीमन का समर्थन कर सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में द्रमुक और एनसीपी NDA का हिस्सा बनते हैं या फिर यह सिर्फ राजनीतिक संभावनाओं तक सीमित रह जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  14 August 2026, 11:17 AM IST

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