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ममता बनर्जी (Img- Pinterest)
Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है। प्रदेश के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरेंगी?
भाजपा के बढ़ते दबदबे और पार्टी में जारी खींचतान के बीच समर्थकों की मांग है कि ममता बनर्जी को खुद सामने आकर मोर्चा संभालना चाहिए ताकि विपक्ष के नेता के रूप में वे विधानसभा में पार्टी की आवाज को मजबूती दे सकें।
उपचुनाव के लिए दो प्रमुख सीटें चर्चा में हैं नंदीग्राम और रेजीनगर। नंदीग्राम सीट सुवेंदु अधिकारी के भवानीपुर बरकरार रखने से खाली हुई है, जहां 2021 में कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। आंकड़ों के लिहाज से इसे ममता बनर्जी के लिए एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
दूसरी ओर, मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर द्वारा खाली की गई है, जहां 65 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। यह जनसांख्यिकी टीएमसी के पक्ष में समीकरण बना सकती है, हालांकि एक वर्ग इसे कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए छोड़ने का सुझाव भी दे रहा है।
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इस उपचुनाव में टीएमसी के सामने सिर्फ प्रतिद्वंद्वी ही नहीं, बल्कि आंतरिक चुनौतियां भी हैं। ऋतव्रत बनर्जी गुट द्वारा खुद को असली तृणमूल बताने और दोनों सीटों पर उतरने के दावे से 'दो फूल' चुनाव चिह्न पर संशय बना हुआ है।
वहीं, आक्रामक मूड में दिख रही भाजपा के नेता सजल घोष ने खुली चुनौती देते हुए कहा है कि ममता दोनों सीटों से लड़ें, जनता उन्हें फिर हराएगी। हालांकि कुणाल घोष का दावा है कि बंगाल की जनता का भरोसा आज भी ममता के साथ है।
Location : Kolkata
Published : 10 September 2026, 8:04 AM IST