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उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से पशु क्रूरता का एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है, जिसने पशु प्रेमियों और आम जनता में भारी रोष पैदा कर दिया है। सूचना के अनुसार, पूर्व विधायक और सपा नेता मसर्रत अली उर्फ़ हाजी बिट्टन के कार्यालय के बाहर तारों पर बिजली का करंट छोड़ा गया, जिसकी चपेट में एक बंदर आ गया।
Badaun: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से पशु क्रूरता का एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है, जिसने पशु प्रेमियों और आम जनता में भारी रोष पैदा कर दिया है। सूचना के अनुसार, पूर्व विधायक और सपा नेता मसर्रत अली उर्फ़ हाजी बिट्टन के कार्यालय के बाहर तारों पर बिजली का करंट छोड़ा गया, जिसकी चपेट में एक बंदर आ गया। करंट की वजह से बंदर की तुरंत मौत हो गई और उसका शव कई घंटों तक तारों पर झूलता रहा, जिससे वहां से गुजरने वाले लोगों में डर और नाराजगी फैली।
इस घटना के बाद, पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने सहसवान कोतवाली में हाजी बिट्टन के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हाजी बिट्टन के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला गंभीर प्रकृति का है, क्योंकि इसमें जानवरों के प्रति क्रूरता और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों को खतरा है।
स्थानीय लोग और पशु अधिकार संगठन इस घटना को बेहद निंदनीय बता रहे हैं। उनका कहना है कि बंदर को इस प्रकार से मारना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह मानवता और नैतिकता के खिलाफ भी है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि मृत बंदर कई घंटों तक तारों पर लटका रहा। इस वीडियो को देखकर लोग हड़कंप मचा रहे हैं और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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सपा नेता हाजी बिट्टन को पार्टी में शिवपाल यादव और धर्मेन्द्र यादव का करीबी माना जाता है। राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण इस मामले ने और अधिक ध्यान आकर्षित किया है। राजनीतिक विश्लेषक भी इस घटना को सार्वजनिक छवि और पार्टी छवि के दृष्टिकोण से संवेदनशील बता रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचित किया गया है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह मामला बड़ा माना जाता है, क्योंकि इसमें जानवरों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
घटना ने पशु क्रूरता और राजनीतिक संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर अब दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले में कड़ी कार्रवाई करें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ न हों।
इस तरह की घटनाएँ समाज में पशु अधिकारों और मानव संवेदनाओं को जागरूक करने का अवसर भी बनती हैं, ताकि लोग जानवरों के प्रति संवेदनशील रहें और कानून का पालन करें। इस मामले की जांच अभी जारी है और जनता इसकी निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।