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नैनीताल के घने जंगलों के बीच स्थित कैंची धाम नीम करोली बाबा की तपस्या और करुणा का पवित्र केंद्र माना जाता है। यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि बाबा की उपस्थिति आज भी हर मन को शांति, सुकून और नई दिशा देती है।
नीम करौली बाबा
Nainital: नैनीताल की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसे कैंची धाम को लोग केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आत्मिक शांति की वह जगह मानते हैं, जहां पहुंचकर मन अपने आप ठहर जाता है। इस पवित्र धाम की पहचान नीम करोली बाबा से जुड़ी है, जिनकी करुणा, सरलता और दिव्य आभा के किस्से दूर-दूर तक फैले हुए हैं। खास बात यह है कि यहां आम लोगों के साथ-साथ दुनिया की बड़ी हस्तियां भी अपने जीवन के संघर्षों से मुक्ति की तलाश में आ चुकी हैं। विराट कोहली, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और एपल के जनक स्टीव जॉब्स जैसे दिग्गजों ने यहां आकर जो शांति महसूस की, वह उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से भी बताई।
कहते हैं कि बाबा पहली बार साठ के दशक की शुरुआत में इस घाटी की ओर आए थे। उस समय यह इलाका शांत, घने जंगलों से घिरा हुआ और लगभग निर्जन था। कुछ ही वर्षों बाद उन्होंने अपने एक करीबी साथी की मदद से 15 जून को यहां एक छोटे से आश्रम की नींव रखी। बाबा की इच्छा थी कि यह स्थान हमेशा सेवा, सादगी और आध्यात्मिक साधना का घर बना रहे। कई लोग बताते हैं कि बाबा ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी यही जगह चुनी और यहीं पर उन्होंने शरीर त्यागकर समाधि ली। बाद में उनके अनुयायियों ने उस स्थान को धाम के रूप में संजो लिया और समय के साथ इसका विस्तार होता चला गया।
कैंची धाम का नाम भी उतना ही दिलचस्प है जितनी इसकी कहानी। यहां आने वाला मार्ग दो तीखे मोड़ों से होकर गुजरता है, जिसे स्थानीय लोग ‘कैंची’ जैसा आकार बताते हैं। इसी विशेष आकृति ने इस स्थान को आज का यह नाम दिया। बाबा हनुमान के परम उपासक थे और अपने जीवनकाल में उन्होंने जगह-जगह उनके मंदिर स्थापित करवाए। कहा जाता है कि जहां भी उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता, वहां वे हनुमान का स्थान बनाने की प्रेरणा दे देते।
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धाम के प्रबंधक प्रदीप शाह, जिन्हें लोग प्यार से भय्यू दा कहते हैं, कई ऐसी घटनाएं सुनाते हैं जिनमें बाबा की दूरदर्शिता और चमत्कारिक शक्ति का एहसास होता है। वे बताते हैं कि एक बार बाबा इस इलाके से गुजर रहे थे और अचानक उन्होंने नदी किनारे मौजूद एक पुरानी गुफा के बारे में पूछना शुरू कर दिया। उस समय यह पूरा क्षेत्र घोर जंगल था, फिर भी बाबा ने उसी स्थान को भविष्य के मंदिर के लिए चुन लिया। थोड़ी ही देर में लोग समझ गए कि यह जगह साधना और ऊर्जा का केंद्र है।
एक और दिलचस्प किस्सा धाम की शुरुआत से जुड़ा है। जब मंदिर बन रहा था, तो एक ग्रामीण ने बाबा से पूछा था कि यहां न पानी है, न रास्ते, न कोई सुविधा फिर लोग आएंगे कैसे? बाबा ने मुस्कराकर कहा था, एक समय आएगा जब इस जगह को देखने दुनिया भर से लोग आएंगे। आज यह बात हकीकत बन चुकी है। भारत ही नहीं, विदेशों से भी लोग यहां पहुंचते हैं, कुछ श्रद्धा लेकर, कुछ जिज्ञासा से और कुछ जीवन की उलझनों को हल्का करने की उम्मीद से।
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कैंची धाम आज भी उसी सादगी और शांत वातावरण के कारण खास बना हुआ है। यहां आने वाला हर व्यक्ति अपने साथ एक अलग अनुभव लेकर लौटता है कभी श्रद्धा, कभी शांति, और कभी एक नई शुरुआत का साहस। यही कारण है कि यह छोटा सा पहाड़ी धाम अब विश्व की आध्यात्मिक धरोहरों में अपना स्थान बना चुका है।