हिंदी
यूपी बीजेपी में संगठन विस्तार की रफ्तार धीमी (Img: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक विस्तार अपेक्षा से धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। नई प्रदेश टीम की घोषणा हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक पार्टी के विभिन्न मोर्चों, क्षेत्रीय समितियों, जिला इकाइयों और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इससे संगठन के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि निचले स्तर पर नई टीम का गठन जितना जल्दी होगा, उतनी ही तेजी से बूथ स्तर तक संगठन की रणनीति लागू की जा सकेगी।
जून के अंत में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया था। उस समय संगठन ने जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देते हुए नई टीम घोषित की थी। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही क्षेत्रीय समितियों, मोर्चों और जिला स्तर के पदाधिकारियों की भी घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन नियुक्तियों का महत्व काफी बढ़ जाता है। जिला प्रभारी, क्षेत्रीय समितियां और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी ही सरकार और संगठन की योजनाओं को बूथ स्तर तक पहुंचाने का काम करते हैं। इन्हीं के जरिए सदस्यता अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम, प्रशिक्षण शिविर और चुनावी तैयारियों का बड़ा हिस्सा संचालित होता है। ऐसे में नियुक्तियों में हो रही देरी को संगठन की गति पर असर डालने वाला माना जा रहा है।
बीजेपी के युवा, महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अल्पसंख्यक और किसान मोर्चा संगठन की जमीनी ताकत माने जाते हैं। ये मोर्चे अलग-अलग वर्गों तक पार्टी की पहुंच मजबूत करते हैं, सदस्यता अभियान चलाते हैं, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखते हैं और चुनाव के दौरान बूथ प्रबंधन से लेकर प्रचार अभियान तक में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
जिला प्रभारी राज्य नेतृत्व और जिला इकाइयों के बीच समन्वय का काम करते हैं। वे संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करते हैं, जिला स्तर पर कार्यक्रमों की समीक्षा करते हैं और समय-समय पर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट भेजते हैं।
Location : Lucknow
Published : 4 August 2026, 1:01 PM IST